राजनीति

महिला आरक्षण पर संग्राम: विपक्ष ने बताया ‘चुनावी साजिश’, सरकार का ‘ऐतिहासिक कदम’

महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में तीखी बहस: विपक्ष ने परिसीमन को ‘चुनावी नक्शा बदलने की साजिश’ बताया, सरकार ने महिलाओं को सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कदम करार दिया

नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026: संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) और इससे जुड़े परिसीमन विधेयक 2026 तथा अन्य संशोधन बिलों पर जोरदार बहस हुई। सरकार ने इन बिलों के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 850 करने का प्रस्ताव रखा है।

विपक्ष (मुख्य रूप से कांग्रेस और INDIA गठबंधन) ने बिल का विरोध किया, जबकि सरकार ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का बड़ा कदम बताया। शाम 4 बजे के आसपास वोटिंग होने वाली थी। प्रमुख नेताओं के मुख्य बयान इस प्रकार रहे:

राहुल गांधी (विपक्ष के नेता, कांग्रेस)

कहा कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि देश का चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है।

आरोप लगाया कि सरकार दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों की प्रतिनिधित्व कम करके उत्तरी राज्यों को फायदा पहुंचाना चाहती है, जो “एंटी-नेशनल एक्ट” है।

बिल को सरकार की “घबराहट की प्रतिक्रिया” बताया और कहा कि विपक्ष इसे हर हाल में पराजित करेगा।

हल्के-फुल्के अंदाज में कहा — “प्रधानमंत्री और मैं, हम दोनों को ‘वाइफ इश्यू’ नहीं है” (महिलाओं के प्रभाव को लेकर)।

स्पीकर ओम बिरला ने उनकी जादूगर वाली कहानी सुनाने पर बीच में टोका।

प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस)

अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा — “गृहमंत्री जी हंस रहे हैं। पूरी योजना बना रखी है। अगर चाणक्य जी जिंदा होते तो आपकी राजनीतिक कुटिलता देखकर चौंक जाते।”

महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए भी इसके परिसीमन से जुड़ाव और समय पर सवाल उठाए।

अमित शाह (गृह मंत्री)

कहा कि INDIA गठबंधन वाले सदस्य महिला आरक्षण का विरोध “ifs and buts” (शर्तों के साथ) कर रहे हैं। कोई सीधे विरोध नहीं कर रहा, लेकिन हर कोई शर्त लगा रहा है।

दक्षिण भारतीय राज्यों (कर्नाटक, आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल) के बारे में विस्तार से आंकड़े दिए और आश्वासन दिया कि कोई राज्य अपनी सीटें नहीं खोएगा।

कांग्रेस पर पुरानी सरकारों में आरक्षण पैनल की सिफारिशों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

कहा कि संविधान में धर्म आधारित आरक्षण नहीं होगा और न ही सरकार इसे कभी देगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

सदन से अपील की कि सभी दल सर्वसम्मति से बिल पास करें। कहा कि क्रेडिट किसी एक को नहीं चाहिए, यह देश की महिलाओं और लोकतंत्र के लिए है।

दक्षिण राज्यों को “नो डिस्क्रिमिनेशन गारंटी” दी और कहा कि भारत को एक के रूप में देखना चाहिए, भागों में नहीं।

अगर विपक्ष “गारंटी” या “प्रॉमिस” शब्द चाहता है तो वे इस्तेमाल करने को तैयार हैं। इरादा साफ है तो शब्दों का खेल नहीं खेलना चाहिए।

पिछले 30 सालों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अब महिलाओं को न्याय देने का मौका है।

अन्य प्रमुख बयान

कंगना रनौत (बीजेपी सांसद): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “सबसे बड़ा फेमिनिज्म का झंडाबरदार” बताया।

अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं ने परिसीमन को जाति जनगणना से जोड़ने और ओबीसी-एससी-एसटी प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई।

राम गोपाल यादव (सपा): कहा कि इतिहास तो 2023 में ही बन चुका था, अब इसे मिटाने की कोशिश क्यों हो रही है?

बहस के दौरान सदन कई बार गरमाया। विपक्ष ने परिसीमन को संघीय ढांचे पर हमला बताया, जबकि सरकार ने इसे एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत को मजबूत करने वाला कदम करार दिया।

सरकार का दावा है कि इन बिलों के पास होने से 2029 के चुनाव में लोकसभा में करीब 272-273 महिला सांसद हो सकेंगी। विपक्ष का मुख्य विरोध परिसीमन के समय और तरीके को लेकर है, जिससे दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत प्रभावित होने का डर है।

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