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बैंकों का बड़ा फैसला: सोना-चांदी का आयात रोक दिया, बंदरगाहों पर फंसा 5 टन से ज्यादा गोल्ड और 8 टन चांदी

बैंकों का बड़ा फैसला: सोना-चांदी का आयात रोक दिया, बंदरगाहों पर फंसा 5 टन से ज्यादा गोल्ड और 8 टन चांदी

नई दिल्ली: सोने-चांदी की बढ़ती मांग और कीमतों के बीच भारतीय बैंकों ने एक अहम कदम उठाया है। विदेशी सप्लायर्स से नए आयात ऑर्डर पूरी तरह रोक दिए गए हैं, क्योंकि सरकार की मंजूरी में देरी हो रही है। इसके चलते 5 टन से ज्यादा सोना और लगभग 8 टन चांदी देश के बंदरगाहों पर कस्टम क्लियरेंस के बिना फंसी हुई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) आमतौर पर अप्रैल की शुरुआत में ही उन बैंकों की सूची जारी कर देता है, जिन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) सोना और चांदी आयात की अनुमति देता है। पिछले साल की अधिसूचना 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुकी है, लेकिन अब तक नई सूची जारी नहीं हुई है। इस अनिश्चितता के कारण बैंकों ने विदेश से नए शिपमेंट का ऑर्डर देना बंद कर दिया है।

मुंबई के बुलियन डीलरों के मुताबिक, जब तक पुरानी खेपें क्लियर नहीं हो जातीं, तब तक नई खरीदारी का कोई फायदा नहीं। इससे सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

क्या है असर?

अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों से पहले सोने-चांदी की डिमांड बढ़ती है, लेकिन आयात रुकने से शॉर्टेज का खतरा मंडरा रहा है।

हालांकि, कुछ घंटे पहले DGFT ने 15 प्रमुख बैंकों (जिनमें SBI, HDFC, Axis आदि शामिल) को मार्च 2029 तक आयात की अनुमति दे दी है, जिससे स्थिति जल्द सामान्य होने की उम्मीद है।

यह देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रिया की वजह से बताई जा रही है, न कि किसी स्थायी रोक की।

बैंकों और व्यापारियों को उम्मीद है कि नई अधिसूचना जारी होते ही फंसी हुई खेपें क्लियर हो जाएंगी और नॉर्मल आयात फिर शुरू हो जाएगा। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में कुछ उछाल देखा जा सकता है।

सरकार और RBI इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं ताकि कीमती धातुओं की सप्लाई प्रभावित न हो और अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

(यह स्थिति तेजी से बदल सकती है। नई DGFT अधिसूचना जारी होते ही अपडेट उपलब्ध होगा।)

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