राजनीति

महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में पूरा दिन: विशेष सत्र में तीन बिल पेश, पीएम मोदी बोले- विरोध करने वालों को लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी

महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में पूरा दिन: विशेष सत्र में तीन बिल पेश, पीएम मोदी बोले- विरोध करने वालों को लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी

नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन लोकसभा में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए तीन अहम विधेयक पेश किए गए। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।

सरकार का प्रस्ताव है कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 850 की जाएं, ताकि महिलाओं को 33% आरक्षण बिना मौजूदा सीटों को घटाए दिया जा सके। आरक्षण 15 साल के लिए होगा और इसमें अनुसूचित जाति-जनजाति महिलाओं के लिए भी सब-कोटा शामिल होगा। परिसीमन नवीनतम जनगणना के आधार पर होगा।28b64d

दिन भर क्या-क्या हुआ?

विधेयक पेश: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित विधेयक पेश किया।

परिचय पर वोटिंग: संविधान संशोधन विधेयक के परिचय पर डिवीजन वोटिंग हुई, जिसमें 251 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 185 ने विरोध किया।

बहस शुरू: पूरे दिन जोरदार बहस चली। सदन की कार्यवाही रात 11 बजे तक चलने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित करते हुए कहा कि “जो आज इस बिल का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” उन्होंने महिलाओं को आरक्षण को “अधिकार” बताया, न कि “एहसान”। पीएम ने कहा कि नियत साफ होने पर शब्दों के खेल की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने सभी दलों से बिल के समर्थन की अपील की और विपक्ष को “क्रेडिट लेने” की पेशकश भी की।2f7959

किसने क्या कहा?

पीएम नरेंद्र मोदी: “महिला आरक्षण नारी शक्ति का हक है। देश को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि हम महिलाओं को कुछ दे रहे हैं। हम सिर्फ उनका लंबे समय से रोका गया अधिकार दे रहे हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह: विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कांग्रेस पर देरी का आरोप लगाया और कहा कि दक्षिणी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस): सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्यों मौजूदा सीटों में ही आरक्षण नहीं दिया जा रहा? देरी पर सवाल किया और 5 बड़े प्रश्न पूछे।

अखिलेश यादव (सपा): बिल का सैद्धांतिक समर्थन किया लेकिन सरकार पर देरी और राजनीतिक मंशा का आरोप लगाया। पूछा- “बीजेपी शासित राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं?”

किरेन रिजीजू: कहा कि यह बिल भारत को दुनिया में मिसाल बनाएगा। गलत अफवाहों का खंडन किया।

विपक्ष ने परिसीमन प्रक्रिया पर चिंता जताई और कहा कि यह दक्षिणी राज्यों की सीटों पर असर डाल सकता है, जबकि सरकार ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का मुद्दा बताया।

महत्वपूर्ण बातें

2023 में पारित मूल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने का प्रावधान था।

अब नए संशोधनों से 2029 चुनाव से पहले इसे अमल में लाने की तैयारी है।

कल (17 अप्रैल) को वोटिंग हो सकती है। एनडीए के पास दो-तिहाई बहुमत के करीब संख्या है।

यह दिन महिला राजनीतिक भागीदारी की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है, हालांकि विपक्ष और सरकार के बीच परिसीमन को लेकर तीखी बहस जारी रही। सत्र 18 अप्रैल तक चलेगा।

अपडेट: शाम तक बहस जारी रही। पीएम मोदी के भाषण के बाद सदन में गर्मागर्मी बढ़ी, लेकिन कोई बड़ा हंगामा रिपोर्ट नहीं हुआ। अधिक अपडेट के लिए सदन की कार्यवाही पर नजर रखें।

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