राजनीति

‘इंडिया’ गठबंधन की मांग- महिला आरक्षण लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर 2029 के आम चुनाव से ही लागू हो

‘इंडिया’ गठबंधन की मांग- महिला आरक्षण लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर 2029 के आम चुनाव से ही लागू हो

संसद के विशेष सत्र को लेकर इंडिया गठबंधन की बैठक में लिया निर्णय 

-परिसीमन विधेयक का विरोध करेंगे विपक्षी दल

कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा- महिला आरक्षण पहले से पारित संविधान संशोधन के आधार पर लागू हो, परिसीमन को लेकर चालें चल रही मोदी सरकार 

राहुल गांधी बोले- मोदी सरकार के प्रस्ताव का महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं, ये संशोधन परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल के जरिए सत्ता पर कब्ज़ा करने का प्रयास 

कहा- कांग्रेस ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्से की चोरी नहीं होने देगी, क्योंकि इसमें जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा

इंडिया गठबंधन ने महिला आरक्षण को लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर 2029 के आम चुनाव से ही लागू करने की मांग करते हुए संसद के विशेष सत्र में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का एकजुट होकर विरोध करने का निर्णय लिया है।

यह फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई गठबंधन की बैठक में लिया गया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विभिन्न विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

बैठक के उपरांत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्रकारों से कहा कि सभी विपक्षी दल महिला आरक्षण के समर्थन में हैं। लेकिन जिस तरह से इसे लाया गया है, वह राजनीति से प्रेरित है और इसीलिए शक के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विपक्षी दलों को निशाना बनाने और उन्हें दबाने के लिए इस तरह से काम कर रही है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि महिला आरक्षण को पहले पास हुए संविधान संशोधन के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन को लेकर मोदी सरकार कुछ चालें चलती दिख रही है। इसलिए, सभी विपक्षी दल एकजुट होकर संसद में इसका विरोध करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसके साथ जोड़े गए परिसीमन के प्रावधान को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

वहीं कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि संसद के विशेष सत्र में जो तीन बिल पेश किए जा रहे हैं, उनमें से एक संविधान संशोधन विधेयक है और दो वैधानिक विधेयक हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में अनुच्छेद 334(ए) को संविधान में शामिल किया गया था। इसमें सर्वसम्मति से महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की बात की गई थी। विपक्षी दल चाहते हैं कि उस प्रावधान को तुरंत लागू किया जाए। विपक्ष की मांग 2023 में भी यही थी कि महिला आरक्षण 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्त लगा दी थी। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच अब सरकार ये बिल लाई है।

उन्होंने कहा कि सभी विपक्षी पार्टियां चाहती हैं कि महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण दिया जाए, इसे लोकसभा की वर्तमान संख्या 543 के आधार पर 2029 के आम चुनाव से ही लागू किया जाए।

जयराम रमेश ने आगे कहा कि सरकार द्वारा रखा गया परिसीमन का प्रस्ताव बेहद खतरनाक है। गृह मंत्री और अन्य मंत्रियों ने कहा है कि लोकसभा में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ेंगी और समानुपातिक रूप से सभी राज्यों की सीटें बढ़ाई जाएंगी, लेकिन ये बात संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के लागू होने पर दक्षिण भारत, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों का प्रतिनिधित्व घटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरीके से परिसीमन आयोग ने असम और जम्मू-कश्मीर में काम किया है, उससे साफ है कि सरकार परिसीमन आयोग का इस्तेमाल बहुमत हासिल करने के लिए एक हथियार के रूप में कर रही है।

जयराम रमेश ने बताया कि सभी विपक्षी पार्टियां परिसीमन के प्रावधानों के बिल्कुल खिलाफ हैं, वे लोकसभा और राज्यसभा में लोकतांत्रिक तरीके से बहस में भाग लेंगी और इसका विरोध करेंगी।

बैठक के बाद राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से महिला आरक्षण का समर्थन करती है। 2023 में महिला आरक्षण बिल को संसद में सर्वसम्मति से पास किया गया था और यह अब हमारे संविधान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। ये संशोधन, परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल के जरिए सत्ता पर कब्ज़ा करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्से की चोरी नहीं होने देगी, क्योंकि इसमें जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। इसके साथ ही कांग्रेस देश के दक्षिणी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देगी।

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