Monday, June 29, 2026
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बैरक नंबर 10 का खौफ: जब जेल में मौत के मुहाने से लौट आए विक्रम भट्ट, बताया ‘चमत्कार’ का सच!

बैरक नंबर 10 का खौफ: जब जेल में मौत के मुहाने से लौट आए विक्रम भट्ट, बताया ‘चमत्कार’ का सच!

​बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट, जो अपनी डरावनी और सस्पेंस फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, हाल ही में खुद एक ऐसी स्थिति से गुजरे जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। उदयपुर सेंट्रल जेल में बिताए गए अपने ‘ट्रॉमेटिक’ दिनों को याद करते हुए विक्रम ने सोशल मीडिया पर एक झकझोर देने वाला नोट साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे बैरक नंबर 10 में उन्होंने मौत को बेहद करीब से देखा।

​ठगी के आरोप और जेल का सफर

​विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान पुलिस ने करीब 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था। इस मामले में उन्हें तीन हफ्ते उदयपुर सेंट्रल जेल में बिताने पड़े। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें नियमित जमानत मिल गई, लेकिन जेल के उन 21 दिनों ने उनकी जिंदगी की परिभाषा बदल दी।

​वह खौफनाक रात: जब लगा कि अंत करीब है

​विक्रम भट्ट ने अपने पोस्ट में जनवरी 2026 की उस कड़ाके की ठंड का जिक्र किया है:

​अचानक बिगड़ी तबीयत: जेल की काल कोठरी जैसी बैरक नंबर 10 में विक्रम को अचानक तेज बुखार और कंपकंपी (Chills) ने घेर लिया।

​मेडिकल मदद का अभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि उस वक्त जेल प्रशासन की ओर से कोई डॉक्टर या तुरंत दवा उपलब्ध नहीं थी। वे पूरी रात दर्द और बुखार में तड़पते रहे।

​अंतिम उम्मीद ‘प्रार्थना’: जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो विक्रम ने बैरक में लगी देवी मां की तस्वीर के सामने घुटने टेक दिए। उन्होंने लिखा, “मैंने ईश्वर से कहा—अगर आप हैं, तो मुझे चमत्कार दिखाइए। मेरे बच्चों, पत्नी और मेरे 90 साल के पिता को मेरी जरूरत है।”

​स्वयं किया उपचार और हुआ ‘चमत्कार’

​मेडिकल टीम के न होने पर विक्रम ने अपनी सूझबूझ और आस्था का सहारा लिया:

​खान-पान में बदलाव: उन्होंने तुरंत अपने भोजन से तेल और नमक पूरी तरह हटा दिया।

​हाइड्रेशन: शरीर को डिटॉक्स करने के लिए भारी मात्रा में पानी पिया।

​आस्था का बल: वे लगातार प्रार्थना करते रहे।

​विक्रम के अनुसार, इसके कुछ घंटों बाद ही उनका बुखार आश्चर्यजनक रूप से उतर गया। उन्होंने इसे पूरी तरह “पावर ऑफ प्रेयर” (प्रार्थना की शक्ति) और एक दैवीय चमत्कार करार दिया।

​”जेल में बिना इलाज के तड़पना और यह सोचना कि शायद आप अपने परिवार को दोबारा कभी नहीं देख पाएंगे, यह दुनिया का सबसे डरावना अनुभव है।” > — विक्रम भट्ट (फेसबुक/इंस्टाग्राम पोस्ट से)

​जेल व्यवस्था पर उठे सवाल

​विक्रम भट्ट की इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहां उनके प्रशंसक उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं, वहीं कई लोग जेलों में कैदियों को मिलने वाली मेडिकल सुविधाओं की बदहाली पर सवाल उठा रहे हैं।

​फिलहाल, विक्रम भट्ट जमानत पर बाहर हैं और उन्होंने अपना ध्यान वापस फिल्म निर्माण पर केंद्रित कर लिया है। उनका कहना है कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से और भी मजबूत बना दिया है।

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