जिम और वर्कआउट के दौरान ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ता खतरा: क्या है मुख्य वजह और क्या सर्जरी है इसका स्थाई समाधान?
जिम और वर्कआउट के दौरान ब्रेन स्ट्रोक का बढ़ता खतरा: क्या है मुख्य वजह और क्या सर्जरी है इसका स्थाई समाधान?
हाल के वर्षों में फिट दिखने की चाहत में युवाओं के बीच जिम जाने का क्रेज बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही वर्कआउट के दौरान ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) और हार्ट अटैक के मामलों में भी चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जिम में की जाने वाली कुछ गलतियाँ जानलेवा साबित हो सकती हैं।
जिम जाने वालों में स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ रहा है?
विशेषज्ञों ने इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए हैं:
अत्यधिक शारीरिक तनाव (Overtraining): क्षमता से अधिक वजन उठाना या बिना ब्रेक लिए घंटों वर्कआउट करना ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा देता है। इससे दिमाग की नस फटने (Hemorrhagic Stroke) का खतरा रहता है।
स्टेरॉयड और सप्लीमेंट्स का सेवन: मांसपेशियों को जल्दी बनाने के चक्कर में लिए जाने वाले कुछ सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड खून को गाढ़ा कर देते हैं, जिससे दिमाग में खून के थक्के (Clots) बनने की संभावना बढ़ जाती है।
डिहाइड्रेशन (Dehydration): वर्कआउट के दौरान शरीर में पानी की कमी से खून गाढ़ा हो जाता है, जो ‘इस्केमिक स्ट्रोक’ का कारण बन सकता है।
साँस रोकना (Valsalva Maneuver): भारी वजन उठाते समय अक्सर लोग अपनी साँस रोक लेते हैं। इससे छाती और मस्तिष्क के अंदर दबाव अचानक बढ़ जाता है, जो स्ट्रोक को ट्रिगर कर सकता है।
क्या सर्जरी से पूरी तरह ठीक हो सकता है मरीज?
ब्रेन स्ट्रोक के इलाज में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति की है। सर्जरी की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है:
1. समय का महत्व (The Golden Hour)
स्ट्रोक के बाद पहले 3 से 4 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर मरीज को इस दौरान अस्पताल पहुँचा दिया जाए, तो बिना सर्जरी के भी ‘थ्रॉम्बोलेसिस’ (इंजेक्शन से थक्का घुलाना) के जरिए जान बचाई जा सकती है।
2. सर्जरी के प्रकार
मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टोमी: यदि दिमाग की बड़ी नस में थक्का जमा है, तो सर्जरी के जरिए उसे बाहर निकाला जाता है। इससे मरीज की स्थिति में बहुत तेजी से सुधार होता है।
क्रेनियक्टोमी: यदि दिमाग के अंदर रक्तस्राव (Bleeding) हुआ है, तो खोपड़ी का एक हिस्सा हटाकर दबाव कम किया जाता है।
3. पूरी तरह रिकवरी की संभावना
हाँ, सर्जरी से मरीज की जान बचाई जा सकती है और कई मामलों में मरीज पूरी तरह ठीक भी हो सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मस्तिष्क का कितना हिस्सा प्रभावित हुआ है। सर्जरी के बाद लंबे समय तक फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता होती है ताकि मरीज अपनी सामान्य गतिविधियों में लौट सके।
बचाव के लिए क्या करें?
वार्म-अप अनिवार्य: जिम शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करें।
ब्लड प्रेशर चेक करें: जिम ज्वाइन करने से पहले अपना फुल बॉडी चेकअप जरूर कराएं।
धीरे-धीरे शुरुआत करें: पहले दिन ही भारी वजन उठाने की कोशिश न करें।
ट्रेनर की सलाह: हमेशा एक योग्य सर्टिफाइड ट्रेनर की देखरेख में ही वर्कआउट करें।
हाइड्रेटेड रहें: वर्कआउट के दौरान पर्याप्त मात्रा में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें।
चेतावनी: यदि जिम में अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर आना, बोलने में लड़खड़ाहट या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत वर्कआउट बंद करें और डॉक्टर से संपर्क करें। यह स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
