सिंधु जल संधि: भारत के कड़े प्रहार से घबराया पाकिस्तान पहुँचा UNSC, कूटनीतिक गलियारों में हलचल
सिंधु जल संधि: भारत के कड़े प्रहार से घबराया पाकिस्तान पहुँचा UNSC, कूटनीतिक गलियारों में हलचल
न्यूयॉर्क/इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को अस्थायी रूप से निलंबित करने के भारत के ऐतिहासिक फैसले ने पाकिस्तान को वैश्विक मंचों पर गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। 23 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के बाद पाकिस्तान अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और महासभा की शरण में पहुँच गया है।
पाकिस्तान की UNSC में गुहार: “मानवीय संकट का खतरा”
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने ‘X’ पर जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री की ओर से एक आधिकारिक पत्र यूएन को सौंपा है।
शांति को खतरा: पाकिस्तान ने भारत के इस फैसले को ‘क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा’ करार दिया है।
मानवीय संकट: पत्र में दावा किया गया है कि संधि के निलंबन से पाकिस्तान में जल संकट और मानवीय आपदा पैदा हो सकती है।
कश्मीर का राग: अपनी पुरानी आदत के अनुसार, पाकिस्तान ने एक बार फिर जल विवाद की आड़ में अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को उछालने की कोशिश की है।
पहलगाम हमला: वह मोड़ जहाँ से ‘खून और पानी’ का साथ छूटा
भारत ने यह कड़ा रुख 23 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के बाद अपनाया।
इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके तार सीधे तौर पर सीमा-पार पाकिस्तान से जुड़े पाए गए।
भारत सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” * यह 65 वर्षों के इतिहास में पहली बार है जब भारत ने 1960 की इस संधि को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की राय: भारत का ‘वॉटर स्ट्राइक’
ग्रीक विश्लेषक दिमित्रा स्टाइकौ सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अब पानी को एक रणनीतिक हथियार (Strategic Weapon) के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
65 साल का धैर्य खत्म: तीन युद्धों और दर्जनों आतंकी हमलों (संसद हमला, 26/11, उरी, पुलवामा) के बावजूद भारत ने इस संधि का पालन किया, लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं।
आतंक की कीमत: विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान को यह समझा दिया है कि आतंकवाद की कीमत अब उसकी ‘राष्ट्रीय जल जीवनरेखा’ को चुकानी पड़ सकती है।
कानूनी और रणनीतिक स्थिति
जहाँ पाकिस्तान परमाणु हथियारों और बांधों पर हमले की खोखली धमकियाँ दे रहा है, वहीं भारत का रुख अडिग है:
बदली परिस्थितियां: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, बदली हुई परिस्थितियों (लगातार आतंकी हमले) के आधार पर संधियों की समीक्षा की जा सकती है।
बैकफुट पर पाकिस्तान: UNSC में जाकर पाकिस्तान खुद को ‘पीड़ित’ दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वैश्विक समुदाय के सामने भारत का तर्क (आतंकवाद बनाम समझौता) अधिक प्रभावी नजर आ रहा है।
निष्कर्ष: सिंधु जल संधि पर भारत का यह ‘सस्पेंशन’ पाकिस्तान के लिए केवल जल संकट नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक और आर्थिक तबाही का संकेत है। अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है—उसे चुनना होगा कि वह आतंक का रास्ता अपनाएगा या अपनी जनता के लिए पानी का।
