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दिल्ली: IRS अधिकारी की बेटी की हत्या में रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे; आरोपी बोला— “मरना नहीं चाहिए था, पर हो गया”

दिल्ली: IRS अधिकारी की बेटी की हत्या में रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे; आरोपी बोला— “मरना नहीं चाहिए था, पर हो गया”

​नई दिल्ली: दिल्ली के एक पॉश इलाके में आईआरएस (IRS) अधिकारी की बेटी की निर्मम हत्या और दरिंदगी के मामले में आरोपी राहुल मीणा की गिरफ्तारी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पुलिस और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी का व्यवहार इतना सामान्य और संवेदनाहीन है कि जांच अधिकारी भी हैरान हैं।

​सुरक्षा के 4 घेरे तोड़कर स्टडी रूम तक पहुँचा आरोपी

​अधिकारी का घर पूरी तरह सुरक्षित था, जहाँ पीड़िता के कमरे तक पहुँचने के लिए चार लॉक (तीन पासकोड वाले) पार करने होते थे। राहुल पिछले 7-8 महीनों से परिवार के साथ काम कर रहा था, इसलिए उसे घर की सुरक्षा और पासकोड की जानकारी थी।

​वारदात का समय: जब अधिकारी अपनी पत्नी के साथ जिम गए थे, तब राहुल घर में दाखिल हुआ।

​हमला: वह छत पर बने स्टडी रूम में पहुँचा जहाँ लड़की UPSC की तैयारी कर रही थी। पैसे न देने पर उसने लड़की के सिर पर भारी लैंप से वार कर उसे बेहोश कर दिया।

​हैवानियत की हदें पार: बेहोशी की हालत में रेप और फिंगरप्रिंट का प्रयास

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, राहुल ने न केवल हत्या की बल्कि जघन्य दरिंदगी भी की:

​गला घोंटा और रेप किया: बेहोश लड़की के साथ उसने दुष्कर्म किया और गला घोंट दिया।

​बायोमेट्रिक्स की कोशिश: आरोपी उसे घसीटकर रूम में ले गया और लॉकर खोलने के लिए लड़की की खून से सनी उंगलियों का इस्तेमाल किया। हालांकि, ब्लड सर्कुलेशन रुकने या खून के धब्बों की वजह से बायोमेट्रिक्स मैच नहीं हुआ और वह चोरी में नाकाम रहा।

​पूछताछ में आरोपी का खौफनाक और ठंडा व्यवहार

​साकेत कोर्ट द्वारा 4 दिन की रिमांड पर भेजे गए राहुल मीणा के बयानों में रत्ती भर भी पछतावा नहीं दिखा:

​”बस यूं ही हो गया”: जब पुलिस ने पूछा कि उसने ऐसा क्यों किया, तो उसका जवाब था— “चोरी का अफसोस नहीं है, पर वो मरनी नहीं चाहिए थी… बस यूं ही हो गया।”

​विश्वासघात: जिस महिला को वह ‘आंटी’ कहता था और जिन्होंने उसे बोनस तक दिया, उन्हीं की बेटी के साथ उसने यह कृत्य किया। उसने घर में घुसने के लिए भी उन्हीं के नाम का सहारा लिया।

​असामान्य व्यवहार: हत्या के बाद राहुल फोन पर बात करने का नाटक करते हुए आराम से बिल्डिंग से बाहर निकला ताकि किसी को शक न हो।

​पुलिस के सामने चुनौतियां

​दिल्ली पुलिस के लिए आरोपी का ‘इमोशनलेस’ (भावनाहीन) होना सबसे बड़ी चिंता है।

​मनोवैज्ञानिक विश्लेषण: पुलिस अब आरोपी का साइकोलॉजिकल प्रोफाइल तैयार कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि क्या वह किसी मानसिक विकार से ग्रस्त है या यह एक सोची-समझी क्रूर साजिश थी।

​सबूतों का संग्रह: फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर पुलिस केस को पुख्ता कर रही है ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

​इस घटना ने राजधानी में ‘हाउस हेल्प’ (घरेलू सहायकों) पर भरोसे और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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