अन्तर्राष्ट्रीय

​चीन की ‘दीवार’ के बाद अब दिल्ली की बारी: क्या बालेन शाह करेंगे भारत-नेपाल संबंधों को ‘रीसेट’?

नेपाल की राजनीति में आए ‘बालेन तूफान’ के बाद अब कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह (बालेन शाह) जल्द ही अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर भारत आ सकते हैं। काठमांडू के मेयर से देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर जितना रोमांचक रहा है, उनकी यह भारत यात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

​चीन की ‘दीवार’ के बाद अब दिल्ली की बारी: क्या बालेन शाह करेंगे भारत-नेपाल संबंधों को ‘रीसेट’?

​काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में ‘जेन-जी’ (Gen Z) क्रांति के नायक और नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत आने का न्योता स्वीकार कर लिया है। 27 मार्च 2026 को पदभार संभालने के बाद यह बालेन शाह की पहली बड़ी कूटनीतिक पहल होगी। जानकारों का मानना है कि यह दौरा केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि दशकों पुराने संबंधों को एक नई दिशा देने की कोशिश है।

​1. पीएम मोदी का न्योता और बालेन की तैयारी

​नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, पीएम नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह के पदभार संभालते ही उन्हें बधाई संदेश के साथ भारत आने का निमंत्रण भेजा था।

​स्वीकृति: बालेन शाह ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है और दोनों देशों के विदेश मंत्रालय अब इस दौरे की तारीखों और एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

​रणनीति: इस बार नेपाल का रुख ‘प्रतीकात्मक’ दौरों के बजाय ‘ठोस परिणामों’ (Tangible Outcomes) पर है। भारत और नेपाल दोनों ही देश इस यात्रा के जरिए कनेक्टिविटी और ऊर्जा समझौतों पर बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं।

​2. ‘चीन की दीवार’ से दूरी: बालेन का बदला हुआ रुख?

​चुनाव से पहले बालेन शाह ने अपने घोषणापत्र से चीन की महात्वाकांक्षी BRI (Belt and Road Initiative) के तहत आने वाले ‘दमक इंडस्ट्रियल पार्क’ जैसे प्रोजेक्ट्स को हटाकर सबको चौंका दिया था।

​उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह नेपाल को किसी भी ‘ऋण जाल’ (Debt Trap) में नहीं फंसने देंगे।

​भारत के साथ उनके ‘मधेसी’ जुड़ाव और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए, नई दिल्ली को उम्मीद है कि उनके कार्यकाल में ‘चीन कार्ड’ खेलने की पुरानी परंपरा पर विराम लगेगा।

​3. संबंधों का ‘रीसेट’ बटन: क्या हैं बड़ी चुनौतियां?

​बालेन शाह के सत्ता में आने से भारत-नेपाल संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं:

​सीमा विवाद: कालापानी और लिपुलेख जैसे मुद्दों पर बालेन का रुख क्या होगा, इस पर दिल्ली की नजर है। मेयर रहते हुए उन्होंने ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगाकर अपनी राष्ट्रवादी छवि साफ कर दी थी।

​आर्थिक सहयोग: जलविद्युत (Hydropower) और डिजिटल पेमेंट (UPI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।

​राजनीतिक बदलाव: बालेन शाह ने नेपाल में ‘वीआईपी कल्चर’ खत्म करने और पुराने राजनीतिक ढर्रे को बदलने का बीड़ा उठाया है। वह चाहते हैं कि भारत के साथ संबंध भी अब ‘पुराने नौकरशाही’ के बजाय ‘आधुनिक और पारदर्शी’ हों।

​4. युवा नेतृत्व और नई उम्मीदें

​35 वर्षीय बालेन शाह दुनिया के सबसे युवा राष्ट्राध्यक्षों में से एक हैं। वह नेपाल को एक ‘बफर स्टेट’ के बजाय भारत और चीन के बीच एक ‘जीवंत पुल’ (Vibrant Bridge) बनाना चाहते हैं। भारत के लिए बालेन शाह एक ऐसे नेता हैं जिनके पास जबरदस्त जनसमर्थन है, और उनके साथ किया गया कोई भी समझौता लंबे समय तक टिकने की संभावना रखता है।

​निष्कर्ष: बालेन शाह की दिल्ली यात्रा भारत-नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ के पुराने रिश्तों को ‘टेक्नोलॉजी और ट्रेड’ के आधुनिक युग में ले जाने का एक सुनहरा मौका है। क्या बालेन अपनी इस यात्रा से पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ पाएंगे? पूरी दुनिया की निगाहें अब उनके ‘भारत द्वार’ पर दस्तक देने पर टिकी हैं।

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