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​Operation Meghdoot: सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर तिरंगे की शान के 42 साल; जानें दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र की वीरगाथा

दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में भारत की जीत और जांबाजी के प्रतीक ‘ऑपरेशन मेघदूत’ को आज (13 अप्रैल, 2026) पूरे 42 साल हो गए हैं। यह न केवल भारतीय सेना का, बल्कि दुनिया का सबसे लंबा चलने वाला निरंतर सैन्य अभियान है।

​यहाँ इस ऐतिहासिक मिशन और वर्तमान स्थिति पर पूरी खबर दी गई है:

​Operation Meghdoot @42: सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर तिरंगे की शान के 42 साल; जानें दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र की वीरगाथा

भारतीय सेना और वायुसेना आज ‘सियाचिन दिवस’ मना रही है। 13 अप्रैल 1984 को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन मेघदूत’ आज अपने 42वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। शून्य से 50 डिग्री नीचे के तापमान और 20,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारतीय जांबाज आज भी मुस्तैदी से डटे हुए हैं, ताकि देश की सीमाएं सुरक्षित रहें।

​1. क्यों शुरू हुआ था ‘ऑपरेशन मेघदूत’?

​1980 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने की नीयत से ‘ऑपरेशन अबाबील’ की योजना बनाई थी। पाकिस्तान वहां विदेशी पर्वतारोहियों को भेजकर उस इलाके पर अपना दावा ठोकना चाहता था।

​इंटेलिजेंस इनपुट: भारतीय खुफिया एजेंसियों को खबर मिली कि पाकिस्तान लंदन से भारी मात्रा में बर्फीले इलाकों के लिए गियर और कपड़े खरीद रहा है।

​त्वरित कार्रवाई: पाकिस्तान के पहुंचने से महज 48 घंटे पहले, भारत ने 13 अप्रैल 1984 को ‘ऑपरेशन मेघदूत’ लॉन्च कर दिया और साल्टोरो रिज की मुख्य चोटियों पर कब्जा कर लिया।

​2. दुनिया का सबसे कठिन रणक्षेत्र

​सियाचिन ग्लेशियर 76 किलोमीटर लंबा है और इसे ‘तीसरा ध्रुव’ (Third Pole) भी कहा जाता है।

​दुश्मन से बड़ी चुनौती मौसम: यहां 90% मौतें युद्ध के कारण नहीं, बल्कि हिमस्खलन (Avalanche), ऑक्सीजन की कमी और फ्रॉस्टबाइट के कारण होती हैं।

​ऊंचाई का रिकॉर्ड: यहां तैनात भारतीय सैनिक दुनिया की सबसे ऊंची पोस्ट ‘बाना टॉप’ (22,143 फीट) की रक्षा करते हैं।

​3. वायुसेना: सियाचिन की जीवनरेखा

​भारतीय वायुसेना (IAF) इस मिशन की रीढ़ की हड्डी है।

​सप्लाई चैन: चीता और चिनूक जैसे हेलीकॉप्टर दुर्गम चोटियों पर राशन, दवाइयां और हथियार पहुंचाते हैं।

​रिकॉर्ड: वायुसेना ने सियाचिन में दुनिया का सबसे ऊंचा हेलीपैड और एयरड्रॉप जोन बनाकर इतिहास रचा है।

​42 सालों में क्या बदला? (वर्तमान स्थिति 2026)

​आज का सियाचिन 1984 के मुकाबले काफी बदल चुका है:

​बेहतर तकनीक: अब सैनिकों के पास बेहतर कपड़े, पोर्टेबल केबिन और अत्याधुनिक संचार उपकरण (VSAT) हैं।

​इको-फ्रेंडली मिशन: सेना ने ग्लेशियर से सैकड़ों टन कचरा हटाकर उसे साफ रखने का अभियान भी चलाया है।

​रणनीतिक बढ़त: भारत आज भी साल्टोरो रिज की सभी प्रमुख ऊंचाइयों पर काबिज है, जिससे उसे पाकिस्तान और चीन दोनों पर नजर रखने में रणनीतिक लाभ मिलता है।

​सलाम शहीदों को: थल सेना की उत्तरी कमान (Northern Command) और वायुसेना ने आज उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने इन बर्फीली वादियों में देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

​क्या आप जानते हैं? सियाचिन का अर्थ बलती भाषा में “गुलाबों की प्रचुरता वाला स्थान” होता है, लेकिन विडंबना यह है कि यह दुनिया का सबसे ठंडा और खतरनाक इलाका है।

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