IPL 2026 में अंपायरिंग पर रार: स्टब्स को नियम का हवाला देकर रोका, तो हार्दिक पांड्या को कैसे मिली छूट?
IPL 2026 में अंपायरिंग के फैसलों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स हार्दिक पांड्या (MI) और ट्रिस्टन स्टब्स (DC) से जुड़े दो अलग-अलग वाकयों को लेकर अंपायर्स पर ‘दोहरे मापदंड’ (Double Standards) अपनाने के आरोप लगा रहे हैं।
पूरा विवाद ‘ग्लव्स बदलने’ (Glove Change) के नियम और अंपायरों की सख्ती को लेकर है। यहाँ मामले की पूरी जानकारी दी गई है:
1. ट्रिस्टन स्टब्स का मामला (DC vs CSK)
दिल्ली कैपिटल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच 11 अप्रैल को हुए मैच के दौरान, ट्रिस्टन स्टब्स क्रीज पर थे।
क्या हुआ: पारी के 19वें ओवर (डेथ ओवर्स) में स्टब्स ने पसीने की वजह से पकड़ (Grip) खराब होने का हवाला देते हुए ग्लव्स बदलने की मांग की।
अंपायर का फैसला: चौथे अंपायर ने स्टब्स की इस मांग को खारिज कर दिया। अंपायर का तर्क था कि ग्लव्स केवल ओवर खत्म होने के बाद ही बदले जा सकते हैं, बीच ओवर में नहीं (जब तक कि वे खराब न हो गए हों)।
नतीजा: अगली ही गेंद पर स्टब्स खराब शॉट खेलकर आउट हो गए। इस फैसले पर दिल्ली के डगआउट में मौजूद नीतीश राणा अंपायर से भिड़ गए, जिसके बाद उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना भी लगाया गया।
2. हार्दिक पांड्या का मामला (MI vs RCB)
इसके ठीक एक दिन बाद, 12 अप्रैल को मुंबई इंडियंस और आरसीबी के मैच में स्थिति अलग दिखी।
क्या हुआ: मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या को मैच के दौरान दो बार ग्लव्स बदलते देखा गया। सोशल मीडिया पर कुछ फैंस का दावा है कि उन्होंने ओवर के बीच में भी ऐसा किया।
अंपायर का फैसला: हार्दिक को ग्लव्स बदलने से नहीं रोका गया और न ही किसी तरह की चेतावनी दी गई।
विवाद का मुख्य कारण: नियम क्या कहते हैं?
क्रिकेट के नियमों (ICC/IPL Playing Conditions) के अनुसार:
नियम: खिलाड़ी को आमतौर पर ओवर के बीच में ग्लव्स बदलने की अनुमति नहीं होती, ताकि खेल की गति (Pace of play) प्रभावित न हो। ग्लव्स केवल ओवर के अंत में या ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान ही बदले जाने चाहिए।
अपवाद: अगर ग्लव्स फट गए हों या सुरक्षा का कोई कारण हो, तो अंपायर बीच ओवर में भी अनुमति दे सकता है।
सवाल क्यों उठ रहे हैं?
प्रशंसकों का कहना है कि जब स्टब्स को ग्लव्स बदलने से रोका गया (जिससे संभवतः उनका विकेट गिरा), तो हार्दिक को आसानी से अनुमति कैसे मिल गई?
तर्क 1: स्टब्स के मामले में खेल पहले ही 6 मिनट देरी से चल रहा था, इसलिए अंपायर ‘स्लो ओवर रेट’ से बचने के लिए सख्त थे।
तर्क 2: हार्दिक ने संभवतः ओवर खत्म होने के बाद या किसी रिव्यू के दौरान (जब खेल पहले से रुका हो) ग्लव्स बदले, इसलिए उन्हें नहीं रोका गया।
हालांकि, तकनीकी तौर पर अंपायरों ने नियम का पालन किया होगा, लेकिन फैंस इसे “बड़े खिलाड़ी बनाम युवा खिलाड़ी” या “टीम के रसूख” से जोड़कर देख रहे हैं, जिससे IPL में अंपायरिंग के स्तर पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
