ईरान को मिलेंगे जब्त किए गए $6 अरब; व्हाइट हाउस ने फंड ट्रांसफर पर दी सफाई
वाशिंगटन/दुबई: ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में चल रही संवेदनशील वार्ताओं के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कुछ ईरानी सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरान के $6 अरब फ्रीज एसेट्स को रिलीज करने पर सहमति जता दी है। लेकिन व्हाइट हाउस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
$6 अरब की राशि मूल रूप से ईरान के दक्षिण कोरिया में तेल निर्यात से हुई कमाई थी। इसे 2018 में डोनाल्ड ट्रंप की पहली सरकार ने JCPOA (परमाणु समझौता) से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद फ्रीज कर दिया था।
2023 में अमेरिका-ईरान प्रिजनर स्वैप (कैदियों की अदला-बदली) के तहत यह राशि कतर के बैंकों में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन केवल मानवीय उद्देश्यों (खाना, दवा आदि) के लिए और सख्त अमेरिकी निगरानी में।
अक्टूबर 2023 के बाद (हमास के हमले के बाद) बाइडेन प्रशासन ने इसे फिर से रिस्ट्रिक्ट कर दिया।
ईरानी दावा vs व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
ईरानी सूत्र (Reuters को दिए बयान में): अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा फ्रीज एसेट्स रिलीज करने पर सहमति दी है। इसे इस्लामाबाद वार्ता में “गुडविल” और “गंभीरता” का संकेत बताया गया। एक सूत्र ने खासतौर पर $6 अरब का जिक्र किया।
व्हाइट हाउस की सफाई (शनिवार 11 अप्रैल 2026): “False. अमेरिका ने ईरान के किसी भी फ्रीज एसेट्स को रिलीज करने पर सहमति नहीं दी है।” एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने साफ कहा — “मीटिंग्स तो अभी शुरू भी नहीं हुई हैं।”
क्यों उठा यह मुद्दा?
ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हो रही वार्ता परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय तनाव और संभावित शांति समझौते पर केंद्रित है। ईरान लंबे समय से अपने फ्रीज एसेट्स (कुल अनुमानित $100 बिलियन से ज्यादा) को रिलीज करने की मांग कर रहा है। लेकिन अमेरिका इसे केवल तभी करने को तैयार है जब ईरान परमाणु समृद्धि सीमित करने, IAEA इंस्पेक्शन और अन्य शर्तों पर सहमत हो।
व्हाइट हाउस ने बार-बार कहा है कि कोई भी रिलीज “मानवीय” आधार पर ही हो सकती है और इसमें सख्त शर्तें लगी रहेंगी। कतर की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अभी की स्थिति (11 अप्रैल 2026 शाम तक)
कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ।
वार्ता जारी है, लेकिन फ्रीज एसेट्स का मुद्दा अभी शुरुआती चरण में टला हुआ लगता है।
अमेरिकी अधिकारी कह रहे हैं कि ईरान की मांगें बाद के चरणों में ही चर्चा होंगी, प्रगति पर निर्भर।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है। ईरान इसे “गुडविल जेस्चर” बताकर दबाव बनाना चाहता है, जबकि अमेरिका सख्ती बरत रहा है।
