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​नेपाल में तेल का महा-संकट: पेट्रोल ₹216 के पार, एक महीने में चौथी बार बढ़े दाम

नेपाल में गहराते ऊर्जा संकट के बीच ईंधन की कीमतों ने आसमान छू लिया है। नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने एक महीने के भीतर चौथी बार कीमतों में भारी इजाफा किया है, जिससे आम जनता की कमर टूट गई है।

​नेपाल में तेल का महा-संकट: पेट्रोल ₹216 के पार, एक महीने में चौथी बार बढ़े दाम

​पड़ोसी देश नेपाल इस समय भीषण आर्थिक और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट (खासकर अमेरिका-ईरान तनाव) में जारी अस्थिरता का हवाला देते हुए नेपाल सरकार ने गुरुवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर दी है।

​नई दरें: अब कितना ढीला होगा जेब?

​नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों में कीमतें अब इस प्रकार हैं:

​पेट्रोल: ₹17 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के साथ अब इसकी कीमत ₹216.50 से ₹219 (नेपाली रुपया) प्रति लीटर तक पहुँच गई है।

​डीजल और मिट्टी का तेल: इनमें ₹25 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया है, जिसके बाद नई कीमत ₹204.50 से ₹207 प्रति लीटर हो गई है।

​रसोई गैस (LPG): प्रति सिलेंडर ₹100 की वृद्धि की गई है, जिससे एक सिलेंडर अब ₹2,010 का मिलेगा।

​हवाई ईंधन: घरेलू उड़ानों के लिए ईंधन के दाम में ₹6 प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई है।

​क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

​नेपाल अपनी जरूरत का सारा पेट्रोलियम पदार्थ भारत (Indian Oil Corporation) से आयात करता है। वर्तमान संकट के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

​मिडिल ईस्ट में तनाव: इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है।

​भारी रेवेन्यू लॉस: नेपाल सरकार का दावा है कि इस बढ़ोत्तरी के बावजूद उन्हें आगामी 15 दिनों में लगभग ₹7.81 अरब का घाटा होने का अनुमान है।

​अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता: पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने NOC को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।

​भारत के सीमावर्ती इलाकों पर असर

​नेपाल में तेल की कीमतों में इस भारी उछाल का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी दिख रहा है। बिहार के रक्सौल जैसे सीमावर्ती इलाकों में अब पेट्रोल और डीजल नेपाल की तुलना में काफी सस्ता हो गया है। इससे सीमा पार से होने वाली तस्करी और स्थानीय व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

​विशेषज्ञों की राय: काठमांडू में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे नेपाल में परिवहन और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की महंगाई चरम पर पहुँच जाएगी।

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