उत्तराखंड

बदरीनाथ धाम: गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा का आगाज, 23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

बदरीनाथ धाम: गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा का आगाज, 23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

​ऋषिकेश: भू-बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की धार्मिक प्रक्रिया विधिवत रूप से शुरू हो गई है। सोमवार, 8 अप्रैल को ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ऋषिकेश में ‘गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा’ में सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने तेल कलश के दर्शन किए और कपाट खुलने की प्रक्रिया का हिस्सा बने श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद दिया।

​शंकराचार्य ने बताया तेल कलश का महत्व

​इस अवसर पर शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि जो पुण्य भगवान बदरी नारायण के प्रत्यक्ष दर्शन से प्राप्त होता है, वही दिव्य पुण्य इस पवित्र तेल कलश के दर्शन मात्र से मिलता है। उन्होंने इस परंपरा को सनातन धर्म की अटूट आस्था का प्रतीक बताया।

​राजमहल से ऋषिकेश तक का सफर

​तिल पिरोने की परंपरा: मंगलवार, 7 अप्रैल को टिहरी राज दरबार (नरेंद्र नगर) में महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह और सुहागिन महिलाओं ने विशेष पूजा-अर्चना के साथ तिलों को पिरोकर तेल निकाला।

​कलश का हस्तांतरण: यह पवित्र तेल कलश श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के पदाधिकारियों को सौंपा गया, जो कल ऋषिकेश पहुंचा था।

​यात्रा का आगामी पड़ाव और कार्यक्रम

​मान्यता है कि इसी तिलों के तेल से कपाट खुलने के दिन भगवान बदरी विशाल का महा-अभिषेक किया जाता है। यात्रा का पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:

​8 अप्रैल (आज): ऋषिकेश से रवाना होकर यात्रा का रात्रि विश्राम लक्ष्मण झूला स्थित शत्रुघ्न मंदिर में होगा।

​9 अप्रैल: यात्रा श्रीनगर गढ़वाल के लिए प्रस्थान करेगी और वहीं रात्रि विश्राम होगा।

​अगला पड़ाव: इसके बाद तेल कलश को डिमरी तीर्थ पुरोहितों के मूल गांव डिम्मर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर ले जाया जाएगा, जहां प्रतिदिन विशेष पूजा होगी।

​20 अप्रैल: यात्रा पाखी और गरुड़ गंगा होते हुए श्री नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) पहुंचेगी।

​21 अप्रैल: रविग्राम पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम।

​22 अप्रैल: तेल कलश शाम तक बदरीनाथ धाम पहुंच जाएगा।

​23 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में खुलेंगे कपाट

​तेल कलश के बदरीनाथ धाम पहुंचने के अगले दिन, यानी 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान बदरी विशाल के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। केंद्रीय धार्मिक डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि पंचायत इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए पूरी तरह समर्पित है।

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