उत्तराखंड

हरिद्वार में जाम से मिलेगी मुक्ति: ₹75 करोड़ प्रति किमी की लागत से बनेगा आधुनिक रोपवे, UP से जमीन लेने की तैयारी तेज

हरिद्वार में जाम से मिलेगी मुक्ति: ₹75 करोड़ प्रति किमी की लागत से बनेगा आधुनिक रोपवे, UP से जमीन लेने की तैयारी तेज

​देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन ‘आधुनिक उत्तराखंड’ को धरातल पर उतारने के लिए हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना पर काम तेज हो गया है। बुधवार को सचिवालय में सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के साथ इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की समीक्षा की और भूमि हस्तांतरण व लागत जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कड़े निर्देश दिए।

​PPP मॉडल पर बदलेगी हरिद्वार की सूरत

​यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत ‘डीबीएफओटी’ (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट एंड ट्रांसफर) आधार पर तैयार की जाएगी।

​उद्देश्य: हरिद्वार शहर में ट्रैफिक के भारी दबाव को कम करना और श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधा देना।

​बनावट: इसमें आधुनिक स्टेशन, वर्कशॉप और सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा।

​प्रोजेक्ट की लागत और कन्सेशन अवधि

​बैठक में परियोजना के वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई:

​निर्माण लागत: स्टेशन और भूमि क्लीयरेंस को छोड़कर, रोपवे के बुनियादी ढांचे के निर्माण की लागत करीब ₹75 करोड़ प्रति किलोमीटर आंकी गई है।

​संचालन अवधि: अभी निजी कंपनी के लिए 30 साल की कन्सेशन अवधि तय है, लेकिन भारी निवेश को देखते हुए सचिव आवास ने इसे 30 साल और (15-15 वर्ष के दो चरण) बढ़ाने का विकल्प रखने का सुझाव दिया है।

​यूपी सिंचाई विभाग से जमीन लेने की कवायद

​प्रोजेक्ट की राह में जमीन का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के पास है।

​लीज प्रक्रिया: उत्तराखंड सरकार अब उत्तर प्रदेश शासन को अनुस्मारक पत्र (रिमाइंडर) भेजेगी।

​प्रस्ताव: इस जमीन को ₹1 प्रतिवर्ष की सांकेतिक दर पर 99 वर्षों की लीज पर उत्तराखंड आवास विभाग को हस्तांतरित करने का आग्रह किया जाएगा। इसके लिए प्रमुख सचिव सिंचाई (उत्तराखंड) को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

​पर्यटन और यातायात को मिलेगा बढ़ावा

​सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह रोपवे न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण भी होगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना की डीपीआर (DPR) और भूमि संबंधी औपचारिकताओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

​निष्कर्ष: यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो हरिद्वार जल्द ही उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहाँ रोपवे का उपयोग केवल पहाड़ों पर चढ़ने के लिए नहीं, बल्कि शहरी यातायात (Urban Transport) के लिए भी किया जाएगा।

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