बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट: क्या 15 अप्रैल तक तय हो जाएगा नया चेहरा? रेस में ये नाम सबसे आगे
बिहार में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। नीतीश ने मार्च 2026 में राज्यसभा चुनाव जीता और 30 मार्च को विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वे 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने वाले हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश 12 अप्रैल के आसपास मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उसके बाद 14 अप्रैल या 15 अप्रैल तक एनडीए नई सरकार बनाकर नए मुख्यमंत्री की शपथ करा सकती है (खरमास अवधि समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में)।
क्या है पूरा मामला?
नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा जाने का ऐलान किया और कहा कि नई सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन रहेगा।
वे अभी भी मुख्यमंत्री बने हुए हैं, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा सदस्य बनने के 14 दिनों के अंदर एक सदन की सदस्यता छोड़नी पड़ती है।
नीतीश का यह कदम बिहार की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। वे पिछले 20 साल से बिहार की सत्ता में प्रमुख रहे हैं।
भाजपा पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी में है, जबकि जेडीयू उप-मुख्यमंत्री पद पर रह सकता है।
रेस में सबसे आगे कौन? मुख्य दावेदार
नीतीश के बाद नए मुख्यमंत्री के रूप में मुख्य रूप से भाजपा के नेताओं के नाम चर्चा में हैं। सबसे आगे ये नाम हैं:
सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) — सबसे मजबूत दावेदार
वर्तमान उप-मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक दल के नेता।
कोइरी (कुशवाहा) समुदाय से, जो बिहार में पिछड़े वर्गों में महत्वपूर्ण है।
नीतीश कुमार ने खुद सम्राट को अपना संभावित उत्तराधिकारी बताया था।
घरेलू विभाग संभाल रहे हैं, पार्टी में तेजी से उभरे।
नित्यानंद राय (Nityanand Rai) — मजबूत विकल्प
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री।
भाजपा के पूर्व बिहार अध्यक्ष, लंबे समय से पार्टी में सक्रिय।
यादव समुदाय से, जिससे भाजपा को नए समीकरण बनाने में मदद मिल सकती है।
अन्य नाम:
विजय कुमार सिन्हा (वर्तमान उप-मुख्यमंत्री)।
दिलीप कुमार जायसवाल (भाजपा मंत्री)।
संजीव चौरसिया (दिघा विधायक)।
नीतीश के बेटे निशांत कुमार का नाम उप-मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में था, लेकिन मुख्यमंत्री पद की रेस में मुख्य रूप से भाजपा के चेहरे हैं।
आगे क्या होगा?
अगर 12 अप्रैल को नीतीश इस्तीफा देते हैं, तो एनडीए की विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा।
उसके बाद राज्यपाल से नई सरकार बनाने का दावा किया जाएगा।
14-15 अप्रैल तक शपथ ग्रहण की संभावना है।
यह बदलाव बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। भाजपा पहली बार सीधे सत्ता की बागडोर संभालेगी, जबकि जेडीयू सहयोगी की भूमिका में रहेगा।
नोट: अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तारीखें और नाम राजनीतिक अटकलों पर आधारित हैं और अंतिम फैसला भाजपा की केंद्रीय नेतृत्व तथा एनडीए की बैठक में होगा। परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए विश्वसनीय स्रोतों से अपडेट फॉलो करें।
बिहार की सियासत में यह नीतीश युग का समापन और नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
