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सात दशक बाद भाभा का सपना हुआ पूरा: कलपक्कम के ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने रचा इतिहास

सात दशक बाद भाभा का सपना हुआ पूरा: कलपक्कम के ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने रचा इतिहास

चेन्नई/कलपक्कम: भारत के परमाणु इतिहास में 6 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने सफलतापूर्वक ‘क्रिटिकलिटी’ (Criticality) हासिल कर ली है। यह उपलब्धि भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा के उस सपने को पूरा करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है, जो उन्होंने 1950 के दशक में देखा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की नागरिक परमाणु यात्रा का एक ‘निर्णायक कदम’ बताते हुए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है।

क्यों खास है यह उपलब्धि?

कलपक्कम का यह रिएक्टर दुनिया के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टरों में से एक है। इसकी खासियतें इसे साधारण रिएक्टरों से अलग बनाती हैं:

* ईंधन पैदा करने वाली मशीन: यह एक ‘ब्रीडर’ रिएक्टर है, जिसका अर्थ है कि यह जितना ईंधन (Plutonium) इस्तेमाल करता है, उससे कहीं अधिक ईंधन पैदा करता है।

* स्वदेशी तकनीक: इसे पूरी तरह से भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है। रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसके पास व्यावसायिक स्तर पर संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है।

* तीन चरणों वाला कार्यक्रम: डॉ. भाभा ने भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए तीन चरणों वाली योजना बनाई थी। PFBR का सफल होना इस योजना के दूसरे चरण की पूर्णता और तीसरे चरण (थोरियम आधारित ऊर्जा) की शुरुआत का संकेत है।

होमी भाभा का वो सपना, जो अब सच हुआ

भारत के पास यूरेनियम का भंडार सीमित है, लेकिन थोरियम का दुनिया में सबसे बड़ा भंडार है। डॉ. भाभा जानते थे कि भारत को ऊर्जा के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उनकी योजना थी:

* प्रथम चरण: प्राकृतिक यूरेनियम से बिजली बनाना।

* द्वितीय चरण: पहले चरण से निकले प्लूटोनियम का इस्तेमाल ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ में करना (जो अब कलपक्कम में सफल हुआ है)।

* तृतीय चरण: थोरियम का उपयोग कर अनंत ऊर्जा प्राप्त करना।

भारत के लिए इसके मायने क्या हैं?

कलपक्कम की यह उपलब्धि भारत को ‘ऊर्जा महाशक्ति’ बनाने की दिशा में गेम-चेंजर साबित होगी:

| विशेषता | लाभ |

| ऊर्जा सुरक्षा | भारत को भविष्य में परमाणु ईंधन के लिए विदेशों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। |

| जीरो कार्बन उत्सर्जन | यह 2070 तक ‘नेट जीरो’ लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। |

| कचरा प्रबंधन | यह रिएक्टर अन्य परमाणु संयंत्रों से निकले कचरे को भी ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

| थोरियम का उपयोग | अब भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग कर हज़ारों सालों तक बिजली पैदा कर सकेगा। |

निष्कर्ष

सात दशकों के कड़े संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और जटिल वैज्ञानिक चुनौतियों को पार करते हुए भारतीय वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि भारत परमाणु तकनीक में किसी से पीछे नहीं है। कलपक्कम का यह रिएक्टर न केवल बिजली देगा, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई ऊर्जा भी प्रदान करेगा।

 

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