होर्मुज बना ‘किल जोन’: ईरान की ‘बेबी पनडुब्बी’ घादिर ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन
होर्मुज बना ‘किल जोन’: ईरान की ‘बेबी पनडुब्बी’ घादिर ने बढ़ाई अमेरिका की टेंशन
तेहरान/वॉशिंगटन: खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में तनाव के बीच ईरान की एक छोटी लेकिन बेहद घातक पनडुब्बी ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में खलबली मचा दी है। ईरान की घादिर-क्लास (Ghadir-class) मिजेट पनडुब्बियों ने इस इलाके को एक ऐसे ‘किल जोन’ में तब्दील कर दिया है, जहां अमेरिका के विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर भी आने से कतरा रहे हैं।
क्यों ‘किलर’ साबित हो रही है यह छोटी पनडुब्बी?
घादिर क्लास पनडुब्बियों को ‘बेबी पनडुब्बी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनका आकार बहुत छोटा (लगभग 120 टन) होता है। लेकिन इनकी खासियत ही इनका सबसे बड़ा हथियार है:
* उथले पानी की मास्टर: होर्मुज जलडमरूमध्य काफी संकरा और उथला (औसतन 36 मीटर गहरा) है। जहां बड़े युद्धपोत और भारी पनडुब्बियां फंस सकती हैं, वहां घादिर आसानी से पैंतरेबाजी करती है।
* पकड़ में आना नामुमकिन: छोटी होने के कारण इनका रडार क्रॉस-सेक्शन बहुत कम है। साथ ही, डीजल-इलेक्ट्रिक इंजन होने की वजह से ये बैटरी पर चलते समय लगभग साइलेंट हो जाती हैं, जिससे अमेरिकी सोनार (Sonar) के लिए इन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है।
* घातक हथियार: यह पनडुब्बी ‘हूट’ (Hoot) जैसे सुपरकैविटेटिंग टॉरपीडो और समुद्री माइन्स बिछाने में सक्षम है, जो किसी भी बड़े जहाज को पल भर में डुबो सकते हैं।
होर्मुज को कैसे बनाया ‘Kill Zone’?
ईरान ने रणनीति के तहत 20 से अधिक घादिर पनडुब्बियों को तैनात किया है। ये पनडुब्बियां समुद्र की तलहटी में ‘खामोश’ बैठकर दुश्मन के जहाजों का इंतजार करती हैं।
“रणनीतिकारों का मानना है कि ईरान ने होर्मुज में एक एसिमेट्रिक ट्रैप (Asymmetric Trap) बिछाया है। यहाँ तकनीक से ज्यादा भौगोलिक स्थिति और ‘सरप्राइज अटैक’ मायने रखता है। अमेरिकी नौसेना के लिए चुनौती यह है कि वे उस खतरे से कैसे लड़ें जो दिखाई ही नहीं देता।”
अमेरिका क्यों है परेशान?
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता निम्नलिखित हैं:
* कैरियर की सुरक्षा: अमेरिका के अरबों डॉलर के एयरक्राफ्ट कैरियर (जैसे USS Abraham Lincoln) इन छोटी पनडुब्बियों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं।
* तेल आपूर्ति ठप होने का डर: अगर ईरान सिर्फ चंद माइन्स भी बिछा दे, तो ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मच जाएगा।
* महंगा डिफेंस: एक छोटी सी घादिर पनडुब्बी को रोकने के लिए अमेरिका को करोड़ों डॉलर के एंटी-सबमरीन निगरानी तंत्र (P-8 पोसाइडन विमान और हेलीकॉप्टर) चौबीसों घंटे तैनात रखने पड़ रहे हैं।
निष्कर्ष
ईरान की यह ‘बेबी पनडुब्बी’ साबित करती है कि युद्ध में हमेशा आकार मायने नहीं रखता। होर्मुज के संकरे रास्ते में यह ‘छोटा पैकेट बड़ा धमाका’ बनकर उभरी है, जिसने महाशक्ति अमेरिका को अपनी समुद्री रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।
