राजनीति

महाराष्ट्र में UCC लाने की तेज तैयारी! BJP विधायक अतुल भातखलकर ने विधानसभा में प्राइवेट बिल पेश किया – विवाद और चर्चा तेज

महाराष्ट्र में UCC लाने की तेज तैयारी! BJP विधायक अतुल भातखलकर ने विधानसभा में प्राइवेट बिल पेश किया – विवाद और चर्चा तेज

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा में 13 मार्च 2026 को बड़ा राजनीतिक ड्रामा! बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर (Andheri East से) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू करने के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल सदन में पेश कर दिया। ये बिल उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर राज्य में UCC लागू करने की मांग करता है, जिससे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना और मेंटेनेंस जैसे पर्सनल मैटर्स में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून बने।

क्या है बिल की मुख्य बातें?

उत्तराखंड UCC की कॉपी: उत्तराखंड में 2024 में पास हुआ UCC बिल (जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन, महिलाओं के अधिकार मजबूत, और बहुविवाह पर रोक जैसी बातें हैं) को आधार बनाकर महाराष्ट्र में लागू करने का प्रस्ताव।

समानता पर फोकस: विधायक भातखलकर ने सदन में कहा – “ये बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। समाज में समानता लाने, महिलाओं को बराबर अधिकार देने और संविधान के आर्टिकल 44 को लागू करने के लिए है।”

प्राइवेट बिल होने की वजह: ये सरकार का ऑफिशियल बिल नहीं, बल्कि प्राइवेट मेंबर बिल है – मतलब व्यक्तिगत रूप से पेश किया गया। लेकिन बीजेपी सरकार (देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में) के समर्थन से इसे आगे बढ़ाने की संभावना है।

साथ ही, विधायक ने संकेत दिया कि राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion Law) भी जल्द लाया जाएगा – “लव जिहाद” रोकने के लिए सख्त प्रावधान।

राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या है?

विपक्ष का विरोध: कांग्रेस, शिवसेना (UBT), NCP (SP) और अन्य विपक्षी दलों ने इसे “संविधान विरोधी” और “अल्पसंख्यक विरोधी” बताया। सदन में हंगामा हुआ, कई सदस्यों ने बिल वापस लेने की मांग की।

बीजेपी का स्टैंड: पार्टी इसे “संविधान की भावना” बताती है। महाराष्ट्र में UCC लागू करने से महिलाओं और कमजोर वर्गों को फायदा होगा – ये बीजेपी का पुराना एजेंडा है (जैसे उत्तराखंड, असम में प्रयास)।

सोशल मीडिया पर #UCCinMaharashtra ट्रेंड कर रहा है – कुछ लोग सपोर्ट कर रहे हैं (“बराबरी जरूरी है”), तो कुछ विरोध (“धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में”)।

आगे क्या?

प्राइवेट बिल होने से इसे कमिटी में भेजा जा सकता है या चर्चा के लिए रखा जा सकता है। अगर पास हुआ तो महाराष्ट्र UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य बन सकता है (उत्तराखंड पहले)।

राज्य सरकार पहले से एंटी-कन्वर्जन बिल (Dharma Swatantrya Adhiniyam 2026) पर काम कर रही है – कैबिनेट ने अप्रूवल दिया, जल्द सदन में आएगा।

चुनावी साल में ये मुद्दा BJP के लिए बड़ा पॉलिटिकल टूल बन सकता है, लेकिन विपक्ष इसे “पोलराइजेशन” का हथियार बता रहा है।

महाराष्ट्र में UCC का ये कदम राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा बटोर रहा है – क्या ये अन्य राज्यों में भी फैलेगा? आपको क्या लगता है, UCC राज्य स्तर पर लागू होना चाहिए या केंद्र से? कमेंट में बताएं।

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