193 सांसदों के हस्ताक्षर, 10 पन्नों का नोटिस! CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का ऐतिहासिक कदम – पहली बार ऐसा हुआ
193 सांसदों के हस्ताक्षर, 10 पन्नों का नोटिस! CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विपक्ष का ऐतिहासिक कदम – पहली बार ऐसा हुआ
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में बड़ा राजनीतिक हंगामा! 13 मार्च 2026 को विपक्षी दलों (मुख्य रूप से INDIA गठबंधन और AAP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग जैसा नोटिस संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंप दिया। ये भारत के इतिहास में पहली बार है जब किसी बैठे हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ऐसा नोटिस दिया गया है।
मुख्य डिटेल्स क्या हैं?
हस्ताक्षर: कुल 193 सांसदों ने नोटिस पर साइन किए – लोकसभा से 130 और राज्यसभा से 63।
नोटिस की लंबाई: करीब 10 पन्नों का विस्तृत नोटिस, जिसमें 7 प्रमुख आरोप लगाए गए हैं।
आरोपों की लिस्ट (सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार):
पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण (partisan and discriminatory conduct)।
चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना (deliberate obstruction of investigation of electoral fraud)।
बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना (mass disenfranchisement)।
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) में अनियमितताएं।
प्रमाणित दुर्व्यवहार (proved misbehaviour)।
एक विशेष राजनीतिक पार्टी के प्रति पक्षपात।
अन्य चुनावी प्रक्रियाओं (जैसे बिहार SIR) में पक्षपात।
किसने शुरू किया?: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पहल पर, INDIA ब्लॉक (कांग्रेस, SP, AAP आदि) के सांसदों ने समर्थन दिया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे बड़े नेता भी शामिल होने की संभावना।
प्रक्रिया क्या है? (CEC को हटाने का नियम)
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट जज जैसी है (संविधान अनुच्छेद 324(5) और CEC Act 2023)।
आधार: सिद्ध दुर्व्यवहार (proved misbehaviour) या अक्षमता (incapacity)।
कदम:
किसी सदन में नोटिस दिया जाता है (लोकसभा में कम से कम 100, राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी – यहां दोनों पार हो गए)।
स्पीकर/चेयरमैन जांच कमिटी बनाते हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत + मौजूद और वोटिंग करने वालों का 2/3) से पास होना चाहिए।
वास्तविक संभावना?: NDA की बहुमत वाली संसद में प्रस्ताव पास होने की संभावना बहुत कम है – विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बनाने और ECI की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्ष: “ECI अब BJP का एक्सटेंशन बन गया है। लोकतंत्र खतरे में है!”
BJP/ECI: अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं, लेकिन BJP इसे “हार की हताशा” बता रही है। ECI ने पहले आरोपों को “निराधार” कहा था।
ये घटना 2026 विधानसभा चुनावों (असम, बंगाल आदि) से पहले ECI की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। क्या आपको लगता है CEC को हटाना चाहिए या ये सिर्फ राजनीतिक खेल है? कमेंट में बताएं।
