उत्तराखंड

आस्था का महासंगम: देहरादून में 94 फीट ऊंचे ‘झंडा जी’ का आरोहण, लाखों संगतों की मौजूदगी में शुरू हुआ ऐतिहासिक मेला

आस्था का महासंगम: देहरादून में 94 फीट ऊंचे ‘झंडा जी’ का आरोहण, लाखों संगतों की मौजूदगी में शुरू हुआ ऐतिहासिक मेला

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की नींव और पहचान से जुड़ा ऐतिहासिक झंडा मेला आज पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। प्रेम, सद्भाव और अटूट आस्था के प्रतीक श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में, सज्जादाशीन महंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में 94 फीट ऊंचे नए झंडे जी का आरोहण किया गया। इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बनने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित विदेशों से आए लाखों श्रद्धालु (संगतें) दरबार साहिब परिसर में उमड़ पड़े।

भोर से शाम तक: झंडे जी के आरोहण की संपूर्ण प्रक्रिया

झंडा जी के आरोहण की प्रक्रिया सुबह तड़के ही प्रारंभ हो गई थी, जो दिनभर विभिन्न चरणों में संपन्न हुई:

* पवित्र स्नान और पूजा (सुबह 7:00 बजे): विशेष प्रार्थना के बाद पुराने झंडे जी को उतारा गया। इसके पश्चात नए ध्वजदंड को दूध, दही, घी और गंगाजल से पवित्र स्नान कराया गया।

* गिलाफ चढ़ाने की रस्म (सुबह 10:00 बजे): सबसे पहले सादे गिलाफ चढ़ाने का कार्य शुरू हुआ। दोपहर 1:00 बजे से सनील के गिलाफ चढ़ाए गए।

* दर्शनी गिलाफ का सौभाग्य: इस वर्ष देहरादून के प्रसिद्ध व्यापारी अनिल कुमार गोयल (पार्क रोड निवासी, पीतांबर दास एंड संस) के परिवार को ‘दर्शनी गिलाफ’ चढ़ाने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।

* ध्वज आरोहण (शाम): महंत देवेंद्र दास महाराज की उपस्थिति में, संगतों के जयकारों और ‘बोले सो निहाल’ के उद्घोष के बीच 94 फीट ऊंचे ध्वजदंड को स्थापित किया गया।

मेले का इतिहास और धार्मिक महत्व

यह मेला सिखों के सातवें गुरु, श्री गुरु हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र श्री गुरु राम राय महाराज के जन्मोत्सव और देहरादून आगमन की स्मृति में मनाया जाता है।

* जन्म और तपस्थली: गुरु महाराज का जन्म 1646 ईस्वी में पंजाब के किरतपुर (होशियारपुर) में हुआ था। उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया और लोक कल्याण के लिए यहाँ एक विशाल ध्वजदंड स्थापित किया।

* परंपरा: प्रतिवर्ष होली के पांचवें दिन (चैत्र मास की कृष्ण पंचमी) को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में झंडा जी का आरोहण किया जाता है।

* आस्था: श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहाँ माथा टेकने और झंडा जी के दर्शन मात्र से असाध्य रोग दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि गुरु महाराज के आशीर्वाद से उनके परिवार आज विदेशों में भी समृद्ध हैं।

मेला कैलेंडर: 27 मार्च तक रहेगी रौनक

25 फरवरी से शुरू हुए धार्मिक आयोजनों के बाद अब औपचारिक रूप से मेला शुरू हो गया है, जो 27 मार्च (रामनवमी) तक चलेगा। आगामी महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

* 10 मार्च: सुबह 7:30 बजे से भव्य नगर परिक्रमा का आयोजन होगा, जिसमें हजारों की संख्या में संगतें शामिल होंगी।

* 27 मार्च: रामनवमी के पावन अवसर पर मेले का विधिवत समापन होगा।

प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था

लाखों की भीड़ को देखते हुए दरबार साहिब प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था की है। पूरे मेला क्षेत्र को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लंगर व ठहरने के विशेष प्रबंध किए गए हैं।

महंत देवेंद्र दास महाराज का संदेश: “यह ध्वज केवल कपड़ा या लकड़ी का दंड नहीं, बल्कि मानवता, एकता और शांति का प्रतीक है। गुरु महाराज का आशीर्वाद सभी पर बना रहे और यह मेला आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करे।”

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