अन्तर्राष्ट्रीय

ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने पर ईरान की कड़ी चेतावनी: ‘अमेरिका को इस क्रूरता का भारी पछतावा होगा’

ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने पर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है! हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमले में यह जहाज डूब गया, जिसमें दर्जनों नौसैनिक मारे गए और कई लापता हैं। यह घटना ऐसे समय हुई जब जहाज भारत में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और MILAN अभ्यास से लौट रहा था।

ईरान का आधिकारिक बयान क्या है?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे “समुद्र में एक अत्याचार” करार दिया और कहा कि अमेरिका ने बिना किसी चेतावनी के अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी जहाज पर हमला किया। अराघची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा,

“मार्क माय वर्ड्स: अमेरिका को इस मिसाल कायम करने पर कड़वा पछतावा होगा।”

ईरान का दावा है कि जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और हमला अनुचित व अवैध था। ईरान ने जवाबी कार्रवाई भी की, जिसमें IRGC ने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी ऑयल टैंकर पर हमला करने का दावा किया है और अमेरिका, इजरायल व उनके सहयोगी जहाजों को खाड़ी में प्रवेश से रोकने की घोषणा की।

घटना के मुख्य तथ्य:

जहाज: IRIS Dena (माउज-क्लास फ्रिगेट), ईरान की नौसेना का आधुनिक युद्धपोत।

स्थान: श्रीलंका के गाले से करीब 40 समुद्री मील दूर, अंतरराष्ट्रीय जल में।

हमला: अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी ने Mk-48 टॉरपीडो से निशाना बनाया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे WWII के बाद दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से डुबोने की पहली घटना बताया।

हानि: जहाज पर करीब 180 क्रू मेंबर थे। श्रीलंका ने 32 लोगों को बचाया, 80-87 शव बरामद हुए, और 100+ लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव: श्रीलंका की नौसेना और एयर फोर्स ने डिस्ट्रेस कॉल मिलते ही तुरंत ऑपरेशन शुरू किया।

यह घटना ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष को हिंद महासागर तक ले आई है, जहां पहले यह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट तक सीमित था। ईरान ने इसे अपनी नौसेना पर बड़ा झटका माना है और बड़े पैमाने पर जवाबी हमलों की तैयारी दिखाई है।

 

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