पतंजलि में फूलों की होली: योग गुरु रामदेव ने अनुयायियों संग मनाया उत्सव; मिडिल ईस्ट संकट पर जताई गहरी चिंता
पतंजलि में फूलों की होली: योग गुरु रामदेव ने अनुयायियों संग मनाया उत्सव; मिडिल ईस्ट संकट पर जताई गहरी चिंता
धर्मनगरी हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में आज होली का एक अनोखा और दिव्य नजारा देखने को मिला। योग गुरु स्वामी रामदेव ने योग भवन में सुबह के योगाभ्यास के पश्चात पतंजलि यूनिवर्सिटी के छात्रों और देश-विदेश से आए योग साधकों के साथ फूलों और अबीर-गुलाल की होली खेली। इस दौरान स्वामी रामदेव भक्ति के रंगों में सराबोर होकर अपने अनुयायियों के साथ झूमते और नृत्य करते भी नजर आए।
फूलों की होली और सांस्कृतिक संदेश
स्वामी रामदेव ने सभी साधकों को तिलक लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत आदि काल से ही संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के रंगों से रंगा हुआ है। पतंजलि परिसर में उत्सव का माहौल तब और भी खास हो गया जब सैकड़ों छात्रों ने पारंपरिक गीतों के बीच योग गुरु के साथ पुष्प वर्षा कर इस पर्व को मनाया।
वैश्विक संघर्ष पर तीखा प्रहार: “दुनिया में खेली जा रही खून की होली”
उत्सव के बीच स्वामी रामदेव ने वैश्विक शांति का आह्वान करते हुए ईरान-इजरायल युद्ध और मिडिल ईस्ट के हालातों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
* युद्ध का विरोध: “एक तरफ हम रंगों की होली खेल रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में खून की होली खेली जा रही है।”
* अमेरिका पर निशाना: स्वामी रामदेव ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया में डॉलर का वर्चस्व कायम करना चाहता है। जो देश डॉलर में ट्रेड नहीं करता, अमेरिका उसे षडयंत्र के तहत निशाना बनाता है।
* शांति की अपील: उन्होंने शिया-सुन्नी गुरुओं, वेटिकन सिटी और विश्व की महाशक्तियों से आगे आकर इस युद्ध को रुकवाने की अपील की।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोर
मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीयों को लेकर स्वामी रामदेव ने कहा कि वहां एक करोड़ से ज्यादा लोग मौजूद हैं जो हमारी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं। उन्होंने कहा:
“इस नाजुक समय में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। भारत सरकार उनकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित है, और प्राथमिकता हमारे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की होनी चाहिए।”
स्वामी रामदेव ने आह्वान किया कि दुनिया को मजहब और डॉलर की लड़ाई छोड़कर मानवता के रंगों को अपनाना चाहिए।
