उत्तराखंड

लोकभवन में बिखरे होली के रंग: सीएम धामी और कैबिनेट मंत्रियों ने जमकर खेली होली, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

लोकभवन में बिखरे होली के रंग: सीएम धामी और कैबिनेट मंत्रियों ने जमकर खेली होली, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित लोकभवन में आज होली मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। रंगों के इस पावन पर्व पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) और कैबिनेट मंत्रियों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी। पूरा परिसर कुमाऊंनी और गढ़वाली होली के गीतों से सराबोर नजर आया।

राज्यपाल का संदेश: समरसता और अर्थव्यवस्था का संगम

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने समस्त देशवासियों और उत्तराखंडियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली का पर्व मानवीय समरसता का प्रतीक है। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए ‘वसंत उत्सव’ का जिक्र करते हुए कहा:

“वसंत के फूल और उनकी खुशबू हमें संदेश दे रहे हैं कि हर उत्तराखंडी की जिम्मेदारी है कि हम अपनी अर्थव्यवस्था को ग्लोबल डिमांड के साथ जोड़ें। रंगों का मिलना प्रभु का आशीर्वाद है।”

सीएम धामी: लोक संस्कृति का संवर्धन और 2027 का लक्ष्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होली को सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने वाला त्योहार बताया। उन्होंने कुमाऊं की प्रसिद्ध ‘बैठकी’ और ‘खड़ी होली’ का विशेष उल्लेख करते हुए लोक संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। सीएम ने कहा:

* एकजुटता: यह त्योहार हमें राष्ट्र निर्माण के लिए एकजुट करता है।

* 25 साल का सफर: उत्तराखंड के 25 साल पूरे होने पर हमारा लक्ष्य इसे देश का श्रेष्ठ राज्य बनाना है।

* सांस्कृतिक विरासत: हमारी पौराणिक संस्कृतियां ही हमारी असली पहचान हैं।

कैबिनेट मंत्रियों का उत्साह और ‘2027’ का संकल्प

समारोह में स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत और कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी शिरकत की।

* गणेश जोशी ने एक बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा, “असली और बड़ी होली तो साल 2027 में मनेगी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव जीतकर हम दोबारा आएंगे।”

सांस्कृतिक छटा और उल्लास

लोकभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में शासन के तमाम वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने होली के गीतों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री आवास पर भी विभिन्न संस्कृतियों से जुड़े लोगों ने मिलजुलकर इस उत्सव को मनाया, जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की तस्वीर पेश कर रहा था।

 

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