Monday, September 7, 2026
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गोपेश्वर में भगवान गोपीनाथ के सानिध्य में होली: भक्ति, रंग और पहाड़ी परंपरा का अनोखा संगम!

गोपेश्वर में भगवान गोपीनाथ के सानिध्य में होली: भक्ति, रंग और पहाड़ी परंपरा का अनोखा संगम!

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित प्राचीन गोपीनाथ मंदिर (गोपेश्वर) में आज (4 मार्च 2026) होली का त्योहार भव्य और दिव्य अंदाज में मनाया गया। यहां की होली अन्य जगहों से बिल्कुल अलग है—यहां होली सिर्फ रंगों का खेल नहीं, बल्कि भगवान शिव (गोपीनाथ) के साथ भक्तों की भक्ति और होल्यारों की परंपरा का उत्सव है। मंदिर परिसर में बैठकी होली और खड़ी होली की धूम दिनभर रही, जहां लोक गीत, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर गूंजती होली के राग ने पूरा माहौल रंगीन कर दिया।

क्यों है गोपीनाथ की होली खास?

मान्यता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रासलीला की थी, और भगवान शिव (गोपीनाथ) के साथ होल्यार होली खेलते हैं—जैसे ब्रज में कान्हा के साथ।

देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे, अबीर-गुलाल उड़ाते हुए मंदिर प्रांगण में भक्ति और रंगों का अद्भुत मेल देखा।

होल्यार टोलियां (जैसे पौड़ी के राठ क्षेत्र से पैठाणी की टोली) मंदिर पहुंचीं और भगवान गोपीनाथ के सानिध्य में होली खेली।

प्राकृतिक रंगों, लोक संगीत और आध्यात्मिक वातावरण ने इसे हिमालयी होली का सबसे अनोखा रूप दिया।

मंदिर के प्राचीन त्रिशूल और शिवलिंग के सामने रंग बिखरते हुए भक्तों की भीड़ ने गोपेश्वर को एक अलग ही रौनक दी।

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