उत्तराखंड

देहरादून में आम-लीची के बौर से एलर्जी का कहर! दून अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी, डॉक्टरों ने दिए बचाव के उपाय

देहरादून में आम-लीची के बौर से एलर्जी का कहर! दून अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी, डॉक्टरों ने दिए बचाव के उपाय

3 मार्च 2026: देहरादून में इन दिनों मौसम सुहाना है, लेकिन साथ ही एक परेशानी भी बढ़ रही है। शहर के आम और लीची के पेड़ों पर खूबसूरत बौर (फूल) आ गए हैं, जो देखने में तो मनमोहक लग रहे हैं, लेकिन इनसे निकलने वाला पोलन (पराग) और बौर के रोंगटेदार रेशे कई लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। एलर्जी, खुजली, छींकें, नाक बहना, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतों के साथ राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया:

देहरादून हमेशा से आम और लीची के लिए प्रसिद्ध रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में ही इन पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाता है।

बौर से निकलने वाला पोलन और उसके रोंगटेदार रेशे हवा में फैलते हैं, जिससे एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रोंकाइटिस और एस्थमा जैसे लक्षण ट्रिगर हो जाते हैं।

मौसम अभी शुष्क (ड्राई) है। दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक के कारण हवा में धूल का कंपोनेंट भी बढ़ गया है, जो पोलन के साथ मिलकर परेशानी को और बढ़ा रहा है।

ओपीडी में एलर्जी, सांस की तकलीफ, नाक-कान-गले और छाती के इन्फेक्शन के मामले कई गुना बढ़ गए हैं।

कौन ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं?

पहले से एलर्जी या अस्थमा के मरीज

बच्चे और बुजुर्ग

सुबह-सवेरे बाहर निकलने वाले लोग (जब पोलन सबसे ज्यादा हवा में होता है)

बचाव के लिए डॉक्टरों की सलाह

डॉ. बिष्ट और अन्य विशेषज्ञों ने कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय बताए हैं:

सुबह के समय मास्क जरूर लगाएं – खासकर N95 या अच्छा फिल्टर वाला मास्क, ताकि पोलन नाक और मुंह में न जाए।

आम-लीची के पेड़ों के नीचे या आसपास कम से कम जाएं – अगर एलर्जी का इतिहास है तो इन इलाकों से दूर रहें।

घर लौटते ही कपड़े बदलें और नहा लें – ताकि पोलन शरीर पर न चिपके।

आंखों को सुरक्षित रखें – चश्मा पहनें या घर में रहते हुए खिड़कियां बंद रखें।

घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें, अगर संभव हो।

पर्याप्त पानी पिएं – ड्राई मौसम में डिहाइड्रेशन से बचाव करें।

लक्षण बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें – एंटी-एलर्जिक दवाएं, इनहेलर या नेजल स्प्रे की जरूरत पड़ सकती है।

देहरादून का यह मौसमी एलर्जी का दौर मार्च-अप्रैल तक चल सकता है। अगर आपको भी छींकें, खुजली या सांस फूल रही है, तो इसे हल्के में न लें – समय पर इलाज करवाएं।

क्या आपको भी इस मौसम में एलर्जी की शिकायत हो रही है? या कोई घरेलू उपाय जानते हैं? कमेंट में जरूर बताएं!

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