उत्तराखंड

रुद्रप्रयाग: मंदाकिनी नदी के सीने पर चल रही मशीनें, अगस्त्यमुनि में अवैध खनन का खेल बेखौफ जारी

रुद्रप्रयाग: मंदाकिनी नदी के सीने पर चल रही मशीनें, अगस्त्यमुनि में अवैध खनन का खेल बेखौफ जारी

रुद्रप्रयाग (अगस्त्यमुनि): उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि-विजयनगर क्षेत्र में पेट्रोल पंप के समीप मंदाकिनी नदी के किनारे मानकों को ताक पर रखकर अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस बेलगाम दोहन पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

मानकों की धज्जियां, मशीनों से हो रहा दोहन

नदी के पट्टे क्षेत्र में तय नियमों के विपरीत भारी मशीनों का उपयोग कर बालू, बजरी और पत्थर निकाले जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन द्वारा निर्धारित लंबाई और चौड़ाई की सीमा को पार कर गहरी खुदाई की जा रही है। दिन-रात दौड़ते डंपर और गरजती मशीनें इस बात का प्रमाण हैं कि खनन कार्य स्वीकृत दायरे से कहीं आगे बढ़ चुका है।

आपदा को खुला निमंत्रण

अगस्त्यमुनि क्षेत्र पहले से ही भूस्खलन और मलबे के प्रवाह की दृष्टि से ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में आता है। अनियंत्रित खनन से भविष्य में निम्नलिखित खतरे पैदा हो सकते हैं:

* भू-कटाव: नदी के किनारों का कटाव बढ़ने से पास के गांवों और कृषि भूमि को खतरा।

* ढांचागत क्षति: केदारनाथ हाईवे (NH) और पुलों के नींव कमजोर होने की आशंका।

* पारिस्थितिक असंतुलन: मंदाकिनी नदी का प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह बाधित होना।

विशेषज्ञों की चेतावनी

प्रसिद्ध पर्यावरणविद जगत सिंह ‘जंगली’ ने चिंता जताते हुए कहा कि मंदाकिनी का अस्तित्व खतरे में है और पूर्व की आपदाओं से सबक न लेना आत्मघाती साबित होगा। वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेंद्र बदरी ने आगाह किया है कि नदी तंत्र के साथ छेड़छाड़ सीधे तौर पर बड़ी आपदा को न्योता देना है।

प्रशासन का पक्ष और स्थानीय सवाल

इस मामले पर रुद्रप्रयाग के उप निदेशक (खान) वीरेंद्र कुमार का कहना है कि:

“मंदाकिनी नदी में अवैध खनन की शिकायतों की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”

हालांकि, स्थानीय जनता प्रशासन के इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं है। लोगों का सवाल है कि जब खुलेआम दिन के उजाले में मशीनें चल रही हैं, तो विभाग को ‘जांच’ के नाम पर वक्त क्यों चाहिए? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?

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