लाइफ स्टाइल

भारत में सरोगेसी के नए नियम: कौन बन सकता है पैरेंट, कानून क्या कहता है और कितना पड़ता है खर्च?

भारत में सरोगेसी (Surrogacy) अब बहुत सख्त नियमों के तहत संचालित होती है। मुख्य कानून Surrogacy (Regulation) Act, 2021 है, जो 25 जनवरी 2022 से लागू है। इसके बाद कुछ संशोधन (2024-2025 में) आए हैं, लेकिन 2026 तक मूल ढांचा वही है।

मुख्य प्रकार: केवल अल्ट्रुइस्टिक (परोपकारी) सरोगेसी अनुमति है

कमर्शियल सरोगेसी (सरोगेट मां को पैसे देकर बच्चा पैदा करवाना) पूरी तरह प्रतिबंधित और दंडनीय है।

सरोगेट मां को केवल चिकित्सा खर्च, बीमा (36 महीने तक), और प्रसव से जुड़े खर्च दिए जा सकते हैं – कोई अतिरिक्त मुआवजा नहीं।

कौन बन सकता है इंटेंडिंग पैरेंट (माता-पिता)?

कानून बहुत सीमित है। मुख्य योग्यता:

भारतीय नागरिक होना चाहिए (NRI/OCI कुछ मामलों में संभव, लेकिन विदेशी नागरिकों को पूरी तरह प्रतिबंधित)।

कानूनी रूप से विवाहित भारतीय दंपति (हेटरोसेक्सुअल) – कम से कम 5 साल की शादी।

आयु सीमा:

पत्नी: 23 से 50 वर्ष

पति: 26 से 55 वर्ष

प्रमाणित बांझपन (infertility) होना चाहिए – डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट जरूरी।

पहले कोई बच्चा नहीं होना चाहिए (बायोलॉजिकल, गोद लिया हुआ या पहले सरोगेसी से) – अपवाद: अगर बच्चा गंभीर बीमारी, विकलांगता या जीवन-घातक स्थिति में हो।

सिंगल व्यक्ति, समलैंगिक दंपति, लाइव-इन पार्टनर, विदेशी (गैर-भारतीय मूल के) – सरोगेसी नहीं कर सकते।

हाल के संशोधन (2024): अगर एक पार्टनर में मेडिकल समस्या हो तो डोनर गैमीट (अंडा या स्पर्म) इस्तेमाल की अनुमति, लेकिन दोनों में समस्या हो तो नहीं।

सरोगेट मां के लिए नियम:

निकट संबंधी (क्लोज रिलेटिव) होना चाहिए।

विवाहित, 25-35 वर्ष की आयु।

कम से कम एक सफल प्रसव का इतिहास।

केवल एक बार सरोगेट बन सकती है।

अपनी गैमीट (अंडा) इस्तेमाल नहीं कर सकती (केवल गेस्टेशनल सरोगेसी)।

प्रक्रिया और कानूनी जरूरतें

सरोगेसी के लिए इंस्टीट्यूशनल रजिस्टर्ड क्लिनिक में ही।

Eligibility Certificate और Essentiality Certificate (डिस्ट्रिक्ट मेडिकल बोर्ड से)।

Court Order – बच्चे की पैरेंटेज और कस्टडी के लिए।

बच्चा जन्म से ही इंटेंडिंग पैरेंट्स का कानूनी बच्चा माना जाता है।

सरोगेट का बीमा और मेडिकल खर्च इंटेंडिंग पैरेंट्स उठाते हैं।

कितना खर्च आता है? (2026 के अनुमानित आंकड़े)

कमर्शियल प्रतिबंध के कारण पहले के मुकाबले खर्च काफी कम हो गया है (क्योंकि सरोगेट को पैसे नहीं दिए जाते)। कुल खर्च ₹10 लाख से ₹25 लाख तक हो सकता है (क्लिनिक, शहर और अतिरिक्त ट्रीटमेंट पर निर्भर)। ब्रेकडाउन:

IVF + एम्ब्रियो ट्रांसफर: ₹3-7 लाख

मेडिकल जांच, दवाएं, प्रेग्नेंसी केयर: ₹4-10 लाख

सरोगेट के मेडिकल + इंश्योरेंस + डिलीवरी खर्च: ₹3-8 लाख

कानूनी फीस, कोर्ट ऑर्डर, बोर्ड सर्टिफिकेट: ₹1-3 लाख

कुछ क्लिनिक्स में कुल पैकेज ₹12-20 लाख तक रहता है। यह सरकारी अस्पतालों में कम और प्राइवेट में ज्यादा हो सकता है।

नोट: ये नियम बहुत सख्त हैं और समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौतियां चल रही हैं (जैसे आयु सीमा या दूसरे बच्चे पर बैन)। हमेशा लेटेस्ट जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइट (Ministry of Health & Family Welfare या ART/Surrogacy Portal) या रजिस्टर्ड IVF क्लिनिक से कन्फर्म करें। अगर आप सरोगेसी पर विचार कर रहे हैं तो कानूनी सलाह जरूर लें!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *