यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक की जंग: 2027 चुनाव से पहले BJP-SP-BSP में रिझाने की होड़, फिर शुरू हुई सोशल इंजीनियरिंग की सियासत
यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक की जंग: 2027 चुनाव से पहले BJP-SP-BSP में रिझाने की होड़, फिर शुरू हुई सोशल इंजीनियरिंग की सियासत
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में ब्राह्मण समुदाय को रिझाने की होड़ तेज हो गई है। जनवरी 2026 में प्रयागराज में ‘शिखा’ (ब्राह्मणों की पवित्र चोटी) को लेकर हुए कथित अपमान ने इस मुद्दे को हवा दी है, और अब सभी प्रमुख पार्टियां—बीजेपी, एसपी और बीएसपी—ब्राह्मणों (प्रबुद्ध वर्ग) को लुभाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रही हैं। राज्य में ब्राह्मणों की आबादी लगभग 12-13 प्रतिशत है, जो चुनावी गणित में निर्णायक भूमिका निभाती है।
हाल ही में बीजेपी के सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) ने आजमगढ़ में 22 फरवरी को ‘समरसता’ रैली का आयोजन किया, जिसमें 10,000 से ज्यादा ‘बुद्धिजीवी ब्राह्मणों’ को आमंत्रित किया गया। एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने इसे पूर्वांचल में ब्राह्मणों से जुड़ने की कोशिश बताया। बीजेपी भी पीछे नहीं है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (ब्राह्मण नेता) ब्राह्मणों के पैर धोकर सम्मान कर रहे हैं, जबकि पार्टी प्रमुख पंकज चौधरी ने एक वेब सीरीज के ‘आपत्तिजनक’ टाइटल पर आपत्ति जताकर ब्राह्मणों की भावनाओं का सम्मान किया है। हालांकि, ब्राह्मणों में बीजेपी के खिलाफ असंतोष की खबरें हैं, जहां वे खुद को ‘हाशिए पर’ महसूस कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी (एसपी) प्रमुख अखिलेश यादव ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए ‘ब्राह्मण लंच’ का आयोजन किया और सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दे रहे हैं। वे परिवारिक कलह से उबर चुके हैं और एआई समिट से लेकर ब्राह्मण बैठकों तक नई रणनीति अपनाकर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने अपनी पुरानी ‘दलित-ब्राह्मण’ गठजोड़ वाली सोशल इंजीनियरिंग को फिर से जिंदा किया है, जो 2007 में उन्हें पूर्ण बहुमत दिला चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ब्राह्मण वोट बीजेपी का पारंपरिक आधार रहा है, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में एसपी को ब्राह्मणों का कुछ समर्थन मिला। अब ‘शिखा विवाद’ ने पार्टियों को मौका दिया है। बीजेपी के ब्राह्मण और ठाकुर नेताओं में भी आंतरिक खींचतान की खबरें हैं, जो पार्टी की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। क्या यह सोशल इंजीनियरिंग 2027 में नया समीकरण बनाएगी? चुनावी सरगर्मियां तेज हैं, और ब्राह्मण समुदाय की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
