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सोशल मीडिया पर लोग क्या करते हैं? Meta की कोर्ट में ‘पोल खुली’: एडिक्टिव फीचर्स से युवा घंटों फंसे रहते हैं!

सोशल मीडिया पर लोग क्या करते हैं? Meta की कोर्ट में ‘पोल खुली’: एडिक्टिव फीचर्स से युवा घंटों फंसे रहते हैं!

अमेरिका में चल रहे एक ऐतिहासिक मुकदमे (landmark social media addiction trial) में Meta (फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) की पोल खुल गई है। CEO मार्क जुकरबर्ग कोर्ट में पेश हुए, जहां उन्होंने स्वीकार किया कि युवा यूजर्स प्लेटफॉर्म पर घंटों बिताते हैं, लेकिन कंपनी का दावा है कि यह “वैल्यू” (मूल्य) की वजह से है, न कि जानबूझकर एडिक्शन से।

मुकदमा युवाओं की मेंटल हेल्थ पर सोशल मीडिया के असर को लेकर है, जहां Meta, YouTube, TikTok और Snapchat पर आरोप है कि उन्होंने इनफिनिट स्क्रॉल, पर्सनलाइज्ड अल्गोरिदम, पुश नोटिफिकेशन्स, लाइक्स, ब्यूटी फिल्टर्स जैसे फीचर्स जानबूझकर ऐसे डिजाइन किए हैं कि बच्चे और टीनएजर्स एडिक्ट हो जाएं।

कोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

जुकरबर्ग ने कहा: “हम सस्टेनेबल कम्युनिटी बनाना चाहते हैं। अगर कुछ अच्छा नहीं है, तो लोग लंबे समय तक नहीं रहेंगे।” लेकिन प्लेन्टिफ (शिकायतकर्ता) के वकीलों ने इंटरनल ईमेल्स, रिसर्च और मैसेजेस दिखाए, जहां Meta के कर्मचारी “टीन यूजेज” बढ़ाने और युवाओं को ज्यादा समय प्लेटफॉर्म पर रखने की बात करते हैं।

एक 2019 रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि टीन यूजर्स इंस्टाग्राम पर “हुकड” (addicted) महसूस करते हैं, भले ही यह उन्हें नेगेटिव फील कराए।

इंटरनल कम्युनिकेशन में कर्मचारियों ने इंस्टाग्राम को “ड्रग” कहा और खुद को “पुशर्स” (ड्रग सप्लायर जैसा) बताया।

Meta ने एक इंटरनल स्टडी (Project Mercury) रोकी, जिसमें पाया गया कि फेसबुक बंद करने वाले लोग डिप्रेशन, एंग्जायटी और लोनलीनेस में कमी महसूस करते हैं।

युवा यूजर्स (11-13 साल के) को प्लेटफॉर्म पर रखने के लिए फीचर्स डिजाइन किए गए, जैसे अनलिमिटेड स्क्रॉल और नोटिफिकेशन्स।

सोशल मीडिया पर लोग मुख्य रूप से क्या करते हैं (कोर्ट फाइलिंग्स से):

स्क्रॉलिंग और कंटेंट कंज्यूमेशन: इंस्टाग्राम/फेसबुक पर घंटों स्क्रॉल करते रहते हैं, रील्स/स्टोरीज देखते हैं।

लाइक्स, कमेंट्स और इंगेजमेंट: पोस्ट पर रिएक्ट करना, दोस्तों से चैट, स्टोरी देखना—ये सब एडिक्टिव फीचर्स से बढ़ावा मिलता है।

ब्यूटी फिल्टर्स और सेल्फ-कंपेयरिजन: युवा लड़कियां/लड़के फिल्टर्स यूज करके बॉडी इमेज से परेशान होते हैं, जिससे बॉडी डिस्मॉर्फिया और डिप्रेशन बढ़ता है।

अनइंटेंशनल यूज: कई यूजर्स “बस चेक करने” आते हैं और घंटों फंस जाते हैं।

एक केस में एक लड़की (Kaley) ने 16 घंटे से ज्यादा एक दिन इंस्टाग्राम पर बिताए, जिससे एंग्जायटी, सुसाइडल थॉट्स और सेक्सटॉर्शन हुआ।

यह ट्रायल हजारों इसी तरह के केसों का पहला बड़ा टेस्ट है, जहां स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स, स्टेट्स और पैरेंट्स Meta पर बिलियन्स डॉलर का दावा कर रहे हैं। Meta का बचाव: “हम यूजर्स की वैल्यू देते हैं, एडिक्शन नहीं बनाते।” लेकिन इंटरनल डॉक्यूमेंट्स से साफ है कि कंपनी युवाओं के समय और अटेंशन को प्रॉफिट के लिए इस्तेमाल करती है।

भारत में भी Meta के खिलाफ प्राइवेसी और कंटेंट रेगुलेशन के केस चल रहे हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट ने डेटा शेयरिंग पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर “क्या करते हैं लोग?”—ज्यादातर स्क्रॉल, लाइक, कमेंट और फंसना! लेकिन अब कोर्ट में यह “फंसना” जानबूझकर डिजाइन किया गया बताया जा रहा है।

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