यौन उत्पीड़न मामले में फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे, दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका
यौन उत्पीड़न मामले में फंसे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे, दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका
ज्योतिष पीठ (ज्योतिर्मठ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न (POCSO एक्ट) के गंभीर आरोपों के बीच बड़ा अपडेट आया है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत (anticipatory bail) की याचिका दाखिल की है। याचिका मंगलवार को उनके वकीलों राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से दायर की गई। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है और जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
मामले का पूरा विवरण:
यह FIR 21 फरवरी 2026 को झूंसी थाने, प्रयागराज में दर्ज की गई थी, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि और 2-3 अज्ञात व्यक्तियों को नामजद किया गया है।
आरोप: माघ मेले (जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक) के दौरान उनके शिविर में नाबालिग बच्चों और एक युवक के साथ बार-बार यौन शोषण किया गया। FIR में BNS की धारा 351(3) और POCSO एक्ट की धाराएं 3, 4(2), 5(l), 6, 16, 17 लगाई गई हैं।
शिकायतकर्ता: तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्पेशल POCSO कोर्ट में आवेदन दायर किया था। 13 फरवरी को POCSO जज विनोद कुमार चौरसिया ने पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। दो पीड़ित शिष्यों के बयान भी दर्ज हो चुके हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पक्ष: उन्होंने आरोपों को “झूठा और साजिश” बताया है। कहा कि आरोप लगाने वाले लड़के कभी उनके गुरुकुल में नहीं आए। उन्होंने जांच किसी गैर-बीजेपी शासित राज्य में कराने की मांग की थी और कहा था कि वे कहीं भाग नहीं रहे।
अब आगे क्या?
प्रयागराज पुलिस जांच तेज कर रही है और स्वामी से पूछताछ हो सकती है।
हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होने पर गिरफ्तारी पर रोक लग सकती है, लेकिन अगर खारिज हुई तो गिरफ्तारी का खतरा बढ़ेगा।
यह मामला धार्मिक जगत में बड़ा विवाद बन चुका है, जहां एक तरफ गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी तरफ साजिश का दावा।
यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक नेतृत्व पर भी असर डाल सकती है। कोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर टिकी है।
