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पति-पत्नी के विवाद में व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग अहम सबूत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेसी से ऊपर फेयर ट्रायल!

पति-पत्नी के विवाद में व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग अहम सबूत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेसी से ऊपर फेयर ट्रायल!

बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों (matrimonial disputes) में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी के व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को फैमिली कोर्ट मजबूत सबूत (strong evidence) के रूप में स्वीकार कर सकता है, भले ही वे बिना सहमति के प्राप्त किए गए हों। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि निष्पक्ष सुनवाई (fair trial) का अधिकार निजता (right to privacy) से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मामले की पूरी डिटेल:

रायपुर के एक पति ने तलाक (divorce) की याचिका दायर की थी।

पति ने पत्नी की अन्य लोगों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग को रिकॉर्ड पर लेने का आवेदन किया, ताकि व्यभिचार (adultery) या अन्य आरोप साबित कर सके।

पत्नी ने विरोध किया और दावा किया कि पति ने उसका मोबाइल हैक कर अवैध रूप से ये सबूत जुटाए, जो उसकी निजता का उल्लंघन है।

फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला दिया, जिसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 का हवाला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट को विशेष शक्ति है – वह किसी भी दस्तावेज, जानकारी या रिपोर्ट को सबूत मान सकता है, अगर वह विवाद के निपटारे में मददगार हो, भले ही भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत वह सामान्य रूप से स्वीकार्य न हो।

कोर्ट ने जोर दिया: “प्राइवेसी पूर्ण अधिकार नहीं है। अगर निजता के नाम पर साक्ष्यों को रोका गया, तो फैमिली कोर्ट का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। फेयर ट्रायल सुनिश्चित करना जरूरी है।”

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

वैवाहिक मामलों में डिजिटल सबूत (WhatsApp chats, call logs, recordings) अब आसानी से इस्तेमाल हो सकेंगे।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी Vibhor Garg vs Neha (2025) में गुप्त रिकॉर्डिंग को तलाक केस में मान्य ठहराया था।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी 2025 में इसी तरह व्हाट्सएप चैट को सबूत माना था।

लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला स्पष्ट रूप से कहता है कि प्राइवेसी का दावा विवाद सुलझाने में बाधा नहीं बनेगा।

यह फैसला देशभर के फैमिली कोर्ट्स के लिए मिसाल बनेगा, जहां तलाक, क्रूरता, व्यभिचार जैसे केसों में डिजिटल सबूतों की भूमिका बढ़ जाएगी। पत्नी की याचिका खारिज होने से पति के पक्ष में राह आसान हो गई है।

अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की वेबसाइट,  चेक करें। क्या आपको लगता है कि डिजिटल सबूतों से न्याय आसान होगा या प्राइवेसी का खतरा बढ़ेगा?

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