राजनीति

सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा ऐलान: नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे, ब्राह्मण-अल्पसंख्यक असंतोष पर खेलेंगे दांव!

सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा ऐलान: नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे, ब्राह्मण-अल्पसंख्यक असंतोष पर खेलेंगे दांव!

बरेली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में नया तूफान! बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (2019 बैच PCS अधिकारी) ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। जनवरी 2026 में यूजीसी एक्ट, शंकराचार्य विवाद और अन्य मुद्दों पर सरकार के खिलाफ इस्तीफा देने के बाद अब उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वे नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। यह घोषणा 13 फरवरी 2026 को आई, जिससे यूपी में ब्राह्मण असंतोष और सनातनी कार्ड पर बहस तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) को इस्तीफा दिया था। उन्होंने यूजीसी की नई गाइडलाइंस को “काला कानून” बताया, जो सामान्य वर्ग (खासकर ब्राह्मण) के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देगा।

माघ मेला में ज्योतिर मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान और अन्य धार्मिक मुद्दों पर भी सरकार की आलोचना की।

इस्तीफे के बाद उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन वे लगातार सक्रिय रहे – समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे, दिल्ली कूच की बात की और SC-ST एक्ट पर भी तीखा हमला बोला।

अब उन्होंने स्पष्ट कहा: “मैं नई राजनीतिक पार्टी बनाऊंगा। समाज में सामान्य वर्ग, ब्राह्मण और सनातन धर्म के लिए कोई मजबूत आवाज नहीं है। 2027 विधानसभा चुनावों में यह विकल्प होगा।”

पार्टी का नाम और फोकस क्या होगा?

अभी पार्टी का नाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक यह सनातनी/ब्राह्मण-केंद्रित या सामान्य वर्ग सुरक्षा पर आधारित होगी।

अलंकार ने कहा कि वे चार्जशीट या दबाव से नहीं डरते। उनका फोकस UGC एक्ट वापसी, ब्राह्मण सम्मान और 2027 चुनावों में “विकल्प” देने पर है।

इस्तीफे के बाद सपा नेता माता प्रसाद पांडे से संपर्क हुआ था, लेकिन अब वे स्वतंत्र पार्टी बनाने पर अड़े हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सपा जॉइन की अफवाह थी, लेकिन उनका ऐलान अलग रास्ते का है।

राजनीतिक प्रभाव:

यूपी में ब्राह्मण असंतोष बढ़ रहा है – BJP के लिए चुनौती, क्योंकि कई ब्राह्मण नेता/कार्यकर्ता भी इस्तीफे दे रहे हैं।

विपक्ष (सपा, कांग्रेस) इसे “एंटी-ब्राह्मण” कैंपेन के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

योगी सरकार ने अलंकार पर डिसिप्लिनरी एक्शन लिया, लेकिन उनका यह कदम 2027 चुनावों से पहले नया मोड़ ला सकता है।

अलंकार अग्निहोत्री अब एक सिविल सर्वेंट से राजनीतिक नेता बनने की राह पर हैं। उनका यह ऐलान यूपी की सियासत को और गरमा देगा।

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