अमेरिका खुद परमाणु परीक्षण फिर शुरू करने की तैयारी में: चीन का पलटवार
जिनेवा/बीजिंग: अमेरिका द्वारा चीन पर गुप्त परमाणु परीक्षण करने के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद चीन ने तीखा पलटवार किया है। चीन ने इन आरोपों को पूरी तरह से “बेबुनियाद” और “सफेद झूठ” करार देते हुए कहा है कि अमेरिका खुद नए परमाणु परीक्षण शुरू करने की तैयारी में है और ऐसे इल्जाम लगाकर बहाना बना रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी थॉमस डिनानो ने 6 फरवरी 2026 को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण सम्मेलन (Conference on Disarmament) में दावा किया कि चीन ने 2020 में गुप्त “यील्ड-प्रोड्यूसिंग” परमाणु परीक्षण किया, जिसमें 22 जून 2020 को एक विस्फोट हुआ। उन्होंने कहा कि चीन “डिकपलिंग” तकनीक का इस्तेमाल कर भूकंपीय निगरानी को चकमा दे रहा है और सैकड़ों टन यील्ड वाले परीक्षणों की तैयारी कर रहा है। यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब न्यू START संधि (अमेरिका-रूस) की समाप्ति हो चुकी है और अमेरिका चीन को भी नए व्यापक परमाणु नियंत्रण समझौते में शामिल करने की मांग कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर 2025 में ही पेंटागन को निर्देश दिया था कि अन्य देशों (रूस और चीन) के कथित परीक्षणों के जवाब में अमेरिका भी परमाणु परीक्षण “बराबर आधार” पर फिर शुरू करे, जो 1992 के बाद पहली बार होगा।
चीन के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये “पूरी तरह से निर्मित झूठ” हैं और अमेरिका अपनी परमाणु परीक्षण नीति को फिर से शुरू करने का बहाना तलाश रहा है। चीन ने कहा कि वह हमेशा जिम्मेदारीपूर्ण रुख अपनाता रहा है और परमाणु परीक्षण पर रोक का पालन करता है। चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह चीन की परमाणु नीति को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है और खुद निरस्त्रीकरण की जिम्मेदारी से बच रहा है।
यह विवाद वैश्विक परमाणु परीक्षण रोक समझौते (CTBT) के अनौपचारिक मोरेटोरियम को कमजोर करने की आशंका पैदा कर रहा है, जिससे विशेषज्ञ चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों ने अभी तक ऐसे किसी परीक्षण का कोई ठोस सबूत नहीं पाया है।
अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह मुद्दा परमाणु हथियारों की नई दौड़ की ओर इशारा कर रहा है।
