ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: कर्मचारियों को बकाया DA का 25% देने का आदेश, 6 मार्च तक जारी करना होगा!
ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: कर्मचारियों को बकाया DA का 25% देने का आदेश, 6 मार्च तक जारी करना होगा!
कोलकाता/नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को करारा झटका देते हुए राज्य के लगभग 20 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 2008 से 2019 तक का बकाया महंगाई भत्ता (Dearness Allowance – DA) कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है और इसे वेतन संशोधन नियमों (ROPA 2009) के अनुसार All India Consumer Price Index के आधार पर कैलकुलेट किया जाए। राज्य सरकार की आर्थिक तंगी वाली दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि DA कोई मेहरबानी नहीं, बल्कि लागू करने योग्य कानूनी हक है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 5 फरवरी 2026 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने पहले के अंतरिम आदेश को दोहराते हुए निर्देश दिया कि बकाया DA का कम से कम 25% हिस्सा 6 मार्च 2026 तक जारी किया जाए। शेष राशि को किस्तों में चुकाने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमिटी गठित की गई है, जो 6 मार्च तक बाइंडिंग पेमेंट शेड्यूल तैयार करेगी। पहली किस्त 31 मार्च 2026 तक चुकाई जाएगी।
यह मामला लंबे समय से चल रहा था, जहां राज्य कर्मचारी यूनियंस केंद्र सरकार के DA रेट्स के बराबर मांग कर रही थीं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने अलग रेट्स पर ही DA दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट के 2022 के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को काफी हद तक बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि DA कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा है और इसे रोका नहीं जा सकता।
इस फैसले से करीब 20 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा, जिन्हें सालों से बकाया राशि (करीब 40,000 करोड़ रुपये अनुमानित) का इंतजार था। बीजेपी ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि ममता सरकार की ‘गलत नीति’ को सुप्रीम कोर्ट ने उजागर किया। कर्मचारी संगठनों ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया और उम्मीद जताई कि जल्द पूरा भुगतान होगा।
राज्य सरकार अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन फैसले का पालन करना होगा। यह निर्णय अन्य राज्यों में भी DA विवादों पर असर डाल सकता है।
