सरेंडर करें राजपाल यादव: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, चेक बाउंस केस में बढ़ी मुश्किलें; 4 फरवरी तक जेल में सरेंडर का आदेश
सरेंडर करें राजपाल यादव: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया सख्त निर्देश, चेक बाउंस केस में बढ़ी मुश्किलें; 4 फरवरी तक जेल में सरेंडर का आदेश
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े मामलों में उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए 4 फरवरी 2026 शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करने का सख्त निर्देश दिया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने अभिनेता के आचरण को ‘निंदनीय’ बताते हुए पहले दी गई अंतरिम राहत (सजा पर रोक) वापस ले ली है।
मामला क्या है?
मामला एक प्राइवेट कंपनी एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी के खिलाफ चेक बाउंस के कई मामले दर्ज कराए थे।
कंपनी ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माण के लिए दी गई रकम (कई करोड़ रुपये) के बदले दिए गए चेक बाउंस हो गए।
ट्रायल कोर्ट ने 2018 में राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया और प्रत्येक को 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई।
2019 में सेशंस कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा।
जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अंतरिम रोक लगाई और समझौते के लिए समय दिया। अदालत ने कई बार समय बढ़ाया और समझौते की कोशिश की।
अदालत को दिए गए वादों के बावजूद राजपाल यादव ने पूरी रकम (करीब 9 करोड़ रुपये बकाया) नहीं चुकाई। कुछ राशि (जैसे 75 लाख रुपये) जमा की गई, लेकिन बाकी नहीं।
कोर्ट ने कहा कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद भुगतान न करना न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन है।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
राजपाल यादव को 4 फरवरी 2026 शाम 4 बजे तक जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करना होगा और ट्रायल कोर्ट की सजा काटनी होगी।
जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को जारी की जाएगी।
अगली सुनवाई 5 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें सरेंडर की रिपोर्ट मांगी जाएगी।
अभिनेता के वकील ने मुंबई में काम का हवाला देकर समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने 4 फरवरी शाम तक का समय दिया।
यह फैसला राजपाल यादव के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि वे पहले भी चेक बाउंस और अन्य वित्तीय मामलों में फंसे रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अदालत की नरमी का फायदा बार-बार उठाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या अभिनेता समय पर सरेंडर करते हैं या आगे अपील करते हैं।
