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तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को ग्रैमी पुरस्कार मिलने पर चीन को लगी मिर्ची, जानिए क्या कहा?

तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा को ग्रैमी पुरस्कार मिलने पर चीन को लगी मिर्ची, जानिए क्या कहा?

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को पहली बार ग्रैमी अवॉर्ड मिलने पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में दलाई लामा ने ‘बेस्ट ऑडियो बुक, नैरेशन एंड स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग’ कैटेगरी में अपना स्पोकन-वर्ड एल्बम Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama के लिए जीत हासिल की। यह एल्बम करुणा, शांति और मानवता की एकता पर उनके विचारों पर आधारित है। दलाई लामा ने पुरस्कार मिलने पर कहा, “मैं इसे कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। मैं इसे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं।”

लेकिन इस पुरस्कार ने चीन को खफा कर दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “यह अच्छी तरह से ज्ञात है कि 14वें दलाई लामा केवल धार्मिक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक निर्वासित हैं जो धर्म के बहाने चीन-विरोधी अलगाववादी गतिविधियां चला रहे हैं।” लिन ने आगे कहा, “हम दृढ़ता से विरोध करते हैं कि संबंधित पक्ष कला पुरस्कारों को चीन-विरोधी राजनीतिक हेरफेर के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करें। यह हमारा स्थिर और स्पष्ट रुख है।”

चीन ने पुरस्कार को “एंटी-चाइना पॉलिटिकल मैनिपुलेशन” का टूल बताया और इसे राजनीतिक मकसद से प्रेरित करार दिया। दलाई लामा 1959 से भारत के धर्मशाला में निर्वासित जीवन जी रहे हैं, जहां वे तिब्बत के लिए स्वायत्तता और धार्मिक स्वतंत्रता की वकालत करते हैं। बीजिंग उन्हें अलगाववादी और विद्रोही मानता है, जबकि दलाई लामा अहिंसक “मिडिल वे” अप्रोच पर जोर देते हैं।

यह घटना 1989 में मिले नोबेल शांति पुरस्कार के बाद दलाई लामा को मिला एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जो चीन के लिए असहज साबित हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह रुख तिब्बत मुद्दे पर उसके सख्त रुख को दर्शाता है, जहां वह दलाई लामा के किसी भी वैश्विक मान्यता को राजनीतिक खतरा मानता है। ग्रैमी जीत ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है, जहां कुछ इसे शांति और करुणा की जीत बता रहे हैं, जबकि चीन इसे राजनीतिक साजिश कह रहा है।

दलाई लामा ने पुरस्कार को “मानवता की एकता और पर्यावरण संरक्षण” की याद दिलाने वाला बताया, लेकिन चीन की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि यह पुरस्कार बीजिंग के लिए “मिर्ची” बन गया है। क्या यह पुरस्कार तिब्बत मुद्दे पर नए बहस को जन्म देगा? समय बताएगा।

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