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पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के रिस्क पर पहली बार बोला WHO? दी ये हिदायत

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के रिस्क पर पहली बार बोला WHO? दी ये हिदायत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के हालिया मामलों पर पहली बार आधिकारिक बयान जारी किया है। WHO ने स्पष्ट किया कि भारत से इस घातक वायरस के आगे फैलने का जोखिम कम है और फिलहाल यात्रा या व्यापार पर कोई प्रतिबंध लगाने की जरूरत नहीं है।

WHO के अनुसार, पश्चिम बंगाल में दिसंबर 2025 से अब तक केवल दो लैबोरेटरी-पुष्टि निपाह वायरस संक्रमण के मामले सामने आए हैं। दोनों मामले उत्तर 24 परगना जिले के बैरासत में एक प्राइवेट अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों (एक 25 वर्षीय पुरुष और एक महिला नर्स) से जुड़े हैं। दोनों मरीजों का इलाज चल रहा है—एक की हालत सुधार हो रही है, जबकि दूसरा गंभीर है।

WHO की मुख्य हिदायतें और आकलन

पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर (sub-national) पर जोखिम मध्यम है, क्योंकि भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में फ्रूट बैट्स (चमगादड़) के रिजर्वॉयर मौजूद हैं, जिससे जानवरों से इंसानों में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर जोखिम कम है। भारत में ऐसे प्रकोपों को नियंत्रित करने की क्षमता साबित हो चुकी है (जैसे केरल में पहले केस)।

अभी तक इंसान से इंसान में बढ़ते संक्रमण का कोई सबूत नहीं मिला है। 196 से ज्यादा संपर्कों की जांच की गई, सभी नेगेटिव आए।

WHO ने यात्रा या व्यापार प्रतिबंधों की सिफारिश नहीं की है। हालांकि, यात्रियों को सलाह दी है कि चमगादड़ों के संपर्क वाले फल/रस से बचें, कटे-फटे फल न खाएं और स्वच्छता बरतें।

संगठन ने भारत सरकार के साथ मिलकर वन हेल्थ सर्विलांस (जानवर-इंसान पर्यावरण) को मजबूत करने पर जोर दिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 5 मामलों की बात कही गई थी, लेकिन केंद्र सरकार और NCDC ने स्पष्ट किया कि केवल दो ही कन्फर्म हैं—बाकी अफवाहें या संदिग्ध केस थे। भारत में निपाह का यह सातवां प्रकोप है और पश्चिम बंगाल में तीसरा (पहले 2001 में सिलीगुड़ी और 2007 में नदिया में)।

निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, जो चमगादड़ों से फैलती है (फल/रस के जरिए या सीधे संपर्क से), और इंसान से इंसान में भी हो सकती है। इसका कोई वैक्सीन या स्पेसिफिक इलाज नहीं है—मृत्यु दर 40-75% तक हो सकती है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से भ्रामक खबरों से बचने और लक्षण (तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस की तकलीफ, मानसिक भ्रम) दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की अपील की है।

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