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‘आकर अपनी बहन की लाश ले जाओ’… दिल्ली पुलिस SWAT कमांडो काजल की दिल दहला देने वाली हत्या की कहानी – दहेज के लालच में पति ने छीनीं दो जिंदगियां!

‘आकर अपनी बहन की लाश ले जाओ’… दिल्ली पुलिस SWAT कमांडो काजल की दिल दहला देने वाली हत्या की कहानी – दहेज के लालच में पति ने छीनीं दो जिंदगियां!

दिल्ली पुलिस की बहादुर SWAT कमांडो काजल (27 वर्ष) की बेरहमी से हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आरोपी उसके ही पति अंकुर (रक्षा मंत्रालय में क्लर्क) पर है, जिसने दहेज की मांग को लेकर उसे इतना पीटा कि 5 दिन बाद उसकी मौत हो गई। सबसे दिल दहला देने वाली बात – काजल 4 महीने की गर्भवती थी, यानी एक नहीं, दो जिंदगियां खत्म हो गईं।

क्या हुआ उस खौफनाक रात?

घटना: 22 जनवरी 2026 की रात करीब 10 बजे, दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके में।

घरेलू विवाद के दौरान अंकुर ने पहले काजल का सिर दरवाजे की चौखट पर पटका, फिर लोहे के डंबल से सिर पर कई बार वार किया।

काजल गंभीर रूप से घायल हो गईं। आरोपी ने खुद उन्हें तारक अस्पताल ले जाया, लेकिन हालत बिगड़ने पर गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया।

5 दिन तक जिंदगी-मौत की जंग लड़ने के बाद 27 जनवरी 2026 को काजल ने दम तोड़ दिया।

सबसे क्रूर हिस्सा – पति का फोन कॉल

हमले के दौरान या तुरंत बाद अंकुर ने काजल के भाई को फोन किया।

पहले कॉल में कहा: “तेरी बहन को मार रहा हूं, पुलिस कुछ नहीं कर सकती।”

कुछ मिनट बाद दूसरा कॉल: “आकर अपनी बहन की लाश ले जाओ” (या “आकर अपनी बहन का शव ले जाओ”)।

भाई और परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। काजल की चीखें फोन पर सुनाई दीं, फिर सन्नाटा…

पृष्ठभूमि और दहेज की प्रताड़ना

काजल सोनीपत (हरियाणा) के गांव बई की रहने वाली थीं। 2022 में ग्रेजुएशन पूरा किया, 2023 में दिल्ली पुलिस में SWAT कमांडो बनीं – AK-47 से मशीन गन तक चलाना जानती थीं।

अंकुर और काजल की लव मैरिज थी, लेकिन शादी के बाद दहेज की मांग शुरू हो गई – गाड़ी, पैसा, आदि।

काजल ने खुद कार खरीदकर दी, लेकिन प्रताड़ना रुकी नहीं।

परिजनों का आरोप: अंकुर को अपनी कुछ अवैध गतिविधियां उजागर होने का डर था, इसलिए हत्या की।

फोरेंसिक जांच में डंबल और चौखट पर खून के निशान मिले।

अब क्या हुआ?

दिल्ली पुलिस ने अंकुर को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या का मुकदमा दर्ज।

काजल का अंतिम संस्कार हो चुका है। परिवार कड़ी सजा की मांग कर रहा है।

पिता राकेश की आंखों में आंसू और गुस्सा: “बेटी ने इतनी मेहनत की, कमांडो बनी… लेकिन दहेज के लालच में सब खत्म!”

यह केस दहेज, घरेलू हिंसा और महिला सुरक्षा की बड़ी चेतावनी है। एक जांबाज कमांडो जो अपराधियों से लड़ती थी, खुद घर में सुरक्षित नहीं रही। समाज को सोचने की जरूरत है – कब तक चलेगा ये क्रूर चक्र?

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