UGC के नए रेगुलेशन पर बवाल: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले – ‘कोई भेदभाव नहीं होगा, किसी को गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं’
UGC के नए रेगुलेशन पर बवाल: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले – ‘कोई भेदभाव नहीं होगा, किसी को गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं’
यूजीसी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस) रेगुलेशंस 2026 को लेकर देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा कि नए नियमों से कोई भेदभाव नहीं होगा, बल्कि ये उच्च शिक्षा में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए हैं। किसी को भी इन नियमों का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा।
मंत्री ने आगे कहा:
“कोई भी किसी के ऊपर अत्याचार या भेदभाव नहीं किया जाएगा।”
“यह सब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है। राज्य सरकारें जो करना चाहेंगी, करेंगी, लेकिन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।”
यह बयान UGC के नए नियमों पर बढ़ते विवाद के बीच आया है, जहां सवर्ण (जनरल कैटेगरी) छात्र और संगठन इसे “एंटी-ब्राह्मण” या “जनरल के खिलाफ भेदभावपूर्ण” बता रहे हैं। विरोध प्रदर्शन दिल्ली (UGC हेडक्वार्टर के बाहर), लखनऊ, बरेली, मेरठ, सहारनपुर, वाराणसी और अन्य यूपी जिलों में जारी हैं। कई BJP नेता और कार्यकर्ता पदों से इस्तीफा दे चुके हैं, और सुप्रीम कोर्ट में PIL भी दायर हो चुकी है।
नए नियमों का मकसद क्या है?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को ये नियम अधिसूचित किए, जो 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन गाइडलाइंस की जगह लेते हैं। मुख्य प्रावधान:
हर संस्थान में इक्विटी कमेटी, इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) और इक्विटी स्क्वाड अनिवार्य।
24/7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली।
जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता आदि आधार पर भेदभाव (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) को रोकना।
OBC को भी शामिल कर लिया गया है (पहले सिर्फ SC/ST पर फोकस था)।
दुरुपयोग पर सजा का प्रावधान (जुर्माना, निलंबन, मान्यता रद्द)।
UGC का दावा: 2019-2025 के बीच जातिगत भेदभाव की शिकायतें 100%+ बढ़ीं, इसलिए सख्त ढांचा जरूरी। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों से प्रेरित।
विरोध क्यों?
जनरल कैटेगरी छात्रों का कहना: भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट, फर्जी शिकायतों से उत्पीड़न का खतरा।
इक्विटी कमेटी में जनरल का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं।
“जनरल को अपराधी मान लिया गया” – ऐसे आरोप।
सोशल मीडिया पर #UGCRollback ट्रेंड, प्रदर्शन और इस्तीफे।
RJD का स्टैंड
RJD ने नियमों का समर्थन किया। प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा: “यह आरक्षित वर्ग को कवच प्रदान करने वाला कानून है। कुछ वर्ग हाय-तौबा मचा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार चुप है।”
शिक्षा मंत्री का बयान विवाद को शांत करने की कोशिश लगता है, लेकिन विरोध जारी है। UGC और सरकार स्पष्टीकरण दे रहे हैं कि नियम सिर्फ समानता के लिए हैं, न कि किसी वर्ग के खिलाफ। स्थिति पर नजर रखी जा रही है – क्या नियमों में संशोधन होगा या विरोध और बढ़ेगा?
