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मौत का लाइव डेमो! 26 जनवरी की झांकी में फंदे पर लटकाया ‘जिंदा युवक’, MP जेल विभाग की करतूत पर विवाद

मौत का लाइव डेमो! 26 जनवरी की झांकी में फंदे पर लटकाया ‘जिंदा युवक’, MP जेल विभाग की करतूत पर विवाद

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर निकाली गई जेल विभाग की झांकी ने देशभक्ति के उत्सव को विवाद और हैरानी में बदल दिया। परेड ग्राउंड पर प्रदर्शित इस झांकी में एक जीवित युवक को फंदे पर लटकाकर दिखाया गया, जिसे “मौत का लाइव डेमो” कहकर लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

झांकी पर लिखा था: “कृष्ण काल से मोहन काल तक” – जो फांसी की सजा की निरंतरता या न्याय व्यवस्था को दर्शाने का प्रयास था। लेकिन तरीका इतना चौंकाने वाला था कि दर्शक स्तब्ध रह गए। युवक को असली फंदे पर लटकाया गया था (सुरक्षा के साथ, लेकिन दिखावे में असली जैसा), और यह दृश्य फांसी की सजा के प्रतीक के रूप में पेश किया गया।

क्या था मकसद?

जेल विभाग का दावा है कि यह नई आपराधिक कानूनों (Bharatiya Nyaya Sanhita आदि) के तहत फांसी की सजा और जेल सुधारों को दिखाने का प्रयास था। झांकी में जेल सुधार, कैदियों की रिहाई और न्याय प्रक्रिया को भी हाइलाइट किया गया था। लेकिन कई लोगों ने इसे असंवेदनशील, मानवाधिकारों का उल्लंघन और देशभक्ति के नाम पर डरावना बताया।

विवाद क्यों?

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग कह रहे हैं: “यह देशभक्ति है या मौत का प्रदर्शन?”

कुछ ने इसे “जेल विभाग की करतूत” कहकर आलोचना की, जबकि कुछ ने कहा कि यह फांसी की सजा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का तरीका था।

गुना जेल प्रशासन ने सफाई दी कि युवक स्वयंसेवक था और कोई खतरा नहीं था, लेकिन फिर भी आलोचना थम नहीं रही।

यह घटना दिल्ली की मुख्य झांकी (जैसे UP की Bundelkhand संस्कृति वाली) से अलग, लोकल स्तर पर हुई, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई।

प्रतिक्रियाएं:

कई नेताओं और एक्टिविस्ट्स ने इसे “अस्वीकार्य” बताया।

जेल विभाग पर सवाल उठ रहे हैं कि गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र अवसर पर ऐसा डरावना प्रदर्शन क्यों?

कुछ यूजर्स मजाक में कह रहे हैं: “अब फांसी भी झांकी में शामिल हो गई!”

यह घटना MP जेल विभाग के लिए बड़ा विवाद बन गई है। प्रशासन ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया, लेकिन जांच की मांग बढ़ रही है। क्या यह जागरूकता का तरीका था या गलत फैसला? बहस जारी है।

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