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एआर रहमान के कम्युनल बायस बयान पर वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया: ‘शांति से रहो, ये मुल्क हमारा है, बस खुश रहो’

एआर रहमान के कम्युनल बायस बयान पर वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया: ‘शांति से रहो, ये मुल्क हमारा है, बस खुश रहो’

ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान हाल ही में अपने बयानों से सुर्खियों में हैं। BBC Asian Network को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि पिछले 8-10 सालों में बॉलीवुड (हिंदी फिल्म इंडस्ट्री) में उन्हें कम काम मिल रहा है, और इसमें पावर डायनामिक्स के बदलाव के साथ-साथ “कम्युनल थिंग” (सांप्रदायिक पूर्वाग्रह) भी एक वजह हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके सामने “फेस टू फेस” नहीं हुआ, बल्कि “चाइनीज व्हिस्पर्स” (अफवाहों) के जरिए सुना है।

इस बयान पर दाएं-बाएं से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं – कुछ ने उन्हें सपोर्ट किया (जैसे जावेद अख्तर, महुआ मोइत्रा), तो कुछ ने तीखी आलोचना की और उन्हें राष्ट्र-विरोधी तक कहा। विवाद बढ़ने पर एआर रहमान ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी: “मेरा इरादा कभी किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था। भारत मेरी प्रेरणा, शिक्षक और घर है। मैंने कभी दर्द या विभाजन पैदा करने की कोशिश नहीं की।” उन्होंने “जय हिंद, जय भारत” कहकर अपनी देशभक्ति दोहराई।

अब इस विवाद पर वेटरन एक्ट्रेस वहीदा रहमान ने भी अपनी राय दी है। स्क्रीन मैगजीन को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उनसे जब एआर रहमान के बयान पर सवाल किया गया, तो उन्होंने शांत और संतुलित तरीके से जवाब दिया:

“हां, मैंने इसके बारे में पढ़ा है, लेकिन मैं इसकी गहराई में नहीं जाना चाहती। जब सब कुछ ठीक चल रहा है, तो ऐसी चीजों पर ध्यान देना जरूरी नहीं लगता।”

“ऐसी छोटी-मोटी चीजें हर देश में होती रहती हैं।”

“काम तो ऊपर-नीचे होता ही रहता है। उम्र के बाद लोग कहते हैं नया या अलग किसी को लाओ। सब कुछ एक जैसा नहीं रहता।”

“अपनी शांति से रहो, ये मुल्क हमारा है, बस खुश रहो – यही मैं कह सकती हूं।”

वहीदा रहमान (87 साल की) ने साफ संकेत दिया कि इंडस्ट्री में काम कम होना उम्र, ट्रेंड्स और बदलावों से जुड़ा हो सकता है, न कि सिर्फ सांप्रदायिकता से। उनकी यह प्रतिक्रिया शांति और एकता पर जोर देती है, और विवाद को बढ़ाने के बजाय इसे सामान्य मानती है।

यह बयान बॉलीवुड में जारी बहस को और गहराई दे रहा है – क्या इंडस्ट्री में सचमुच सांप्रदायिक पूर्वाग्रह है, या यह सिर्फ बदलते दौर की बात है? कई लोग वहीदा जी की बात से सहमत नजर आ रहे हैं, जो शांति और खुशी पर फोकस करती है।

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