बजट से पहले रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा
बजट 2026 से ठीक पहले भारतीय मुद्रा (रुपया) में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर (All-time low) 91.99 पर पहुंच गया। बाजार में इस भारी उथल-पुथल ने निवेशकों और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
यहाँ इस बड़ी गिरावट के मुख्य कारण और प्रभाव दिए गए हैं:
1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले विदेशी मुद्रा बाजार से परेशान करने वाली खबर आई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में इसमें करीब 1.5% से अधिक की गिरावट देखी गई है, जो 2022 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
रुपये के गिरने की 5 बड़ी वजहें
* ग्रीनलैंड विवाद और वैश्विक तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते विवाद ने दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश (डॉलर और सोना) की ओर भाग रहे हैं।
* विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली: जनवरी 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹30,000 करोड़ से ज्यादा निकाल लिए हैं। जब विदेशी निवेशक शेयर बेचते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया गिरता है।
* भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी: वाशिंगटन द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% टैरिफ और ट्रेड डील में लगातार हो रही देरी ने सेंटिमेंट खराब किया है।
* येन कैरी ट्रेड (Yen Carry Trade): जापान में ब्याज दरों के बढ़ने से वैश्विक निवेशकों ने उन कर्जों को चुकाना शुरू कर दिया है जो उन्होंने कम ब्याज पर लिए थे। इसके लिए वे भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।
* आयातकों द्वारा डॉलर की भारी मांग: कच्चे तेल और अन्य जरूरी सामानों के आयातकों ने भविष्य में रुपये के और गिरने के डर से पहले ही भारी मात्रा में डॉलर खरीदना शुरू कर दिया है (Hedging), जिससे रुपये पर दबाव बढ़ गया है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
* महंगाई: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
* विदेश यात्रा और पढ़ाई: विदेशों में पढ़ना और घूमना अब काफी महंगा हो जाएगा।
* इलेक्ट्रॉनिक सामान: स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य विदेशी कलपुर्जे महंगे होने की संभावना है।
विशेषज्ञ की राय: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थिति नहीं सुधरी, तो रुपया जल्द ही 92.50 के स्तर को भी छू सकता है। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि क्या आरबीआई (RBI) बाजार में दखल देकर रुपये को और गिरने से बचाएगा।
अगला कदम: क्या आप जानना चाहते हैं कि रुपये की इस गिरावट का शेयर बाजार (Sensex/Nifty) पर क्या असर पड़ा है या बजट में इस संबंध में क्या घोषणाएं हो सकती हैं?
