राजनीति

BMC मेयर चुनाव 2026: BJP-शिंदे शिवसेना में खींचतान जारी

BMC मेयर चुनाव 2026: BJP-शिंदे शिवसेना में खींचतान जारी, फडणवीस की वापसी के बाद होगा फैसला

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव नतीजों के बाद अब मेयर पदों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। खासकर ब्रिहनमुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर कौन होगा, यह अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है। गुरुवार (22 जनवरी) को हुई लॉटरी प्रक्रिया में BMC मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किया गया, जिससे साफ हो गया कि मुंबई की अगली मेयर एक महिला ही होंगी। BJP ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं, कुल मिलाकर महायुति को 118 सीटें हासिल हुईं जो बहुमत (114) से चार ज्यादा हैं।

लेकिन महायुति में BJP और शिंदे शिवसेना के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान जारी है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज रात मुंबई लौटेंगे, उसके बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से चर्चा होगी। अगले 4-5 दिनों में फैसला होने की उम्मीद है।

उद्धव गुट की अपील: चुनाव नतीजों के बाद सत्ता की जंग के बीच उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना (UBT) के नेता भास्कर जाधव ने शिंदे गुट से अपील की है कि वे BMC मेयर पद के लिए उद्धव के उम्मीदवार को समर्थन दें। जाधव ने कहा, “एकनाथ शिंदे को मान-अपमान भूलकर उद्धव ठाकरे के साथ आना चाहिए। यह बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुंबई पर शिवसेना का भगवा झंडा फहरना चाहिए।” जाधव ने आगे कहा कि अगर शिंदे गुट समर्थन देता है, तो मुंबई का मेयर शिवसेना का होगा, जो बालासाहेब के विचारों को आगे बढ़ाने का सही तरीका है।

हालांकि, महायुति के बहुमत को देखते हुए उद्धव गुट की यह अपील फिलहाल असरदार नहीं लग रही। BJP के अंदरूनी सूत्रों से पता चला है कि मेयर पद के लिए पांच-छह महिला नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें अलका केरकर (पूर्व डिप्टी मेयर), राजश्री शिरवडकर, शीतल गंभीर देसाई, आशा मराठे, रितु तावड़े शामिल हैं। हर्षिता नर्वेकर का नाम पहले चर्चा में था, लेकिन अब वे रेस से बाहर बताई जा रही हैं।

अन्य महानगरपालिकाओं का हाल: पूरे महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं में से 15 में महिला मेयर होंगी। धुले, जलगांव, सांगली आदि में भी मेयर चुनाव जल्द होंगे, लेकिन मुंबई का पद सबसे हाई-प्रोफाइल है।

सियासी जानकारों का मानना है कि महायुति में डेडलॉक जल्द सुलझ जाएगा, क्योंकि केंद्र और राज्य में दोनों पार्टियां साथ हैं। लेकिन अगर खींचतान लंबी चली, तो विपक्ष को फायदा हो सकता है। फैंस और मुंबईकरों को इंतजार है कि आखिर मुंबई की ‘फर्स्ट सिटीजन’ कौन होंगी। ज्यादा अपडेट्स के लिए फॉलो करें!

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