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20 साल बाद इंग्लैंड क्रिकेट में धमाका: 2005 एशेज के हीरो ट्रॉय कूली बने पेस-बॉलिंग लीड कोच, ECB ने 60 साल के दिग्गज को किया वापस बुलावा

20 साल बाद इंग्लैंड क्रिकेट में धमाका: 2005 एशेज के हीरो ट्रॉय कूली बने पेस-बॉलिंग लीड कोच, ECB ने 60 साल के दिग्गज को किया वापस बुलावा

क्रिकेट में लंबे ब्रेक के बाद वापसी कोई नई बात नहीं, लेकिन इंग्लैंड क्रिकेट टीम में एक ऐसा नाम लौटा है जो इतिहास रच चुका है। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने ट्रॉय कूली (Troy Cooley) को पेस-बॉलिंग लीड कोच के तौर पर नियुक्त कर दिया है। यह वापसी करीब 20 साल बाद हुई है—2005 की ऐतिहासिक एशेज सीरीज के बाद ट्रॉय अपने देश ऑस्ट्रेलिया लौट गए थे। अब 60 साल के इस दिग्गज कोच ने इंग्लैंड के तेज गेंदबाजी सिस्टम की कमान संभाली है।

2005 एशेज में क्या कमाल किया था ट्रॉय ने?

2005 की एशेज सीरीज को इंग्लैंड क्रिकेट का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। 18 साल बाद इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर एशेज वापस जीती थी। उस सीरीज में इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों—एंड्रयू फ्लिंटॉफ, स्टीव हार्मिसन, मैथ्यू हॉगार्ड और साइमन जोन्स—ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को धूल चटाई थी। ट्रॉय कूली उस समय इंग्लैंड के पेस कोच थे और उन्होंने इन गेंदबाजों की तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती पर इतना काम किया कि वे दुनिया के सबसे खतरनाक अटैक में शुमार हो गए।

नई भूमिका में क्या जिम्मेदारी?

ECB ने ट्रॉय को पेस-बॉलिंग लीड कोच बनाया है, जिसमें उनकी जिम्मेदारी होगी:

यंग लायंस (अंडर-19) से लेकर लायंस (A टीम) और सीनियर टीम तक सभी स्तर पर तेज गेंदबाजों का विकास।

नए टैलेंट की पहचान, तकनीकी सुधार, फिटनेस प्रोग्राम और मैच-विनिंग माइंडसेट बनाना।

इंग्लैंड के पेस अटैक को फिर से दुनिया के टॉप लेवल पर लाना, खासकर घरेलू कंडीशंस में।

ECB के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने कहा,

“ट्रॉय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कोचों में से एक हैं। दो दशक से ज्यादा का उनका रिकॉर्ड खुद बोलता है। उन्होंने हर तरह की परिस्थितियों में विश्व स्तरीय तेज गेंदबाज तैयार किए हैं। उनका अनुभव न सिर्फ सीनियर टीम के लिए, बल्कि आने वाली नई पीढ़ी के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा।”

ट्रॉय कूली का करियर हाइलाइट्स

2000-2006: इंग्लैंड पेस कोच (2005 एशेज जीत का हीरो)

2006 के बाद: ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के पेस कोच (2006-2011), जहां मिशेल जॉनसन, मिशेल स्टार्क, पैट कमिंस जैसे गेंदबाजों का विकास किया।

2011-2019: साउथ अफ्रीका और फिर पाकिस्तान के साथ काम।

हाल के वर्षों में: विभिन्न देशों में कंसल्टेंट और हाई-परफॉर्मेंस कोच के तौर पर सक्रिय।

इंग्लैंड के लिए क्या मतलब?

इंग्लैंड की तेज गेंदबाजी पिछले कुछ सालों में चोटों और फॉर्म की वजह से कमजोर दिखी है। जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड के रिटायरमेंट के बाद मार्क वुड, ओली रॉबिन्सन और क्रिस वोक्स जैसे गेंदबाज अकेले जूझ रहे हैं। ट्रॉय कूली की वापसी से उम्मीद है कि नए टैलेंट जैसे जोश टोंग, ब्रायडन कार्स, सैम कुक और युवा तेज गेंदबाजों को नया जोश मिलेगा।

20 साल बाद एक एशेज हीरो की वापसी—यह सिर्फ कोचिंग नहीं, बल्कि इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक बड़ा संदेश है: पुराने योद्धा अभी भी लड़ सकते हैं! क्या ट्रॉय कूली इंग्लैंड को फिर से पेस अटैक का डरावना नाम बना पाएंगे? अगली एशेज में इसका जवाब मिलेगा।

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