आवारा कुत्तों पर टिप्पणी के लिए मेनका गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार! ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ कहा, लेकिन मैग्नेनिमिटी से बख्शा – पूरा मामला
आवारा कुत्तों पर टिप्पणी के लिए मेनका गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार! ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट’ कहा, लेकिन मैग्नेनिमिटी से बख्शा – पूरा मामला
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 20 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों (stray dogs) के हमलों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने उनकी टिप्पणियों को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (अदालत की अवमानना) बताया, लेकिन “कोर्ट की उदारता” (magnanimity) के कारण कंटेम्प्ट की कार्रवाई नहीं की। साथ ही उनकी “बॉडी लैंग्वेज” पर भी सवाल उठाए।
क्या हुआ पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट का पिछला ऑर्डर (13 जनवरी 2026): जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों के हमलों को “गंभीर समस्या” बताया। कोर्ट ने कहा:
बच्चों या बुजुर्गों पर कुत्ते के हमले (मौत या चोट) के हर मामले में राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूला जाएगा।
पिछले 5 सालों में नियम लागू न करने पर राज्यों की जिम्मेदारी।
कुत्तों को खाना खिलाने वालों (feeders) पर भी जवाबदेही तय की जाएगी – अगर इतना प्यार है तो घर ले जाएं, सड़कों पर क्यों घूमने दें।
आक्रामक या रेबीज वाले कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए।
कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणियां “sarcastic” नहीं, बल्कि गंभीर थीं।
मेनका गांधी की प्रतिक्रिया:
उन्होंने एक पॉडकास्ट/इंटरव्यू में कोर्ट की टिप्पणियों की आलोचना की।
कहा कि कोर्ट को “circumspect” (सावधान) रहना चाहिए।
कोर्ट के ऑर्डर को “disservice to the nation” बताया।
पहले भी (नवंबर 2025) उन्होंने शेल्टर में कुत्तों को रखने के ऑर्डर को “impractical” और “financially unviable” कहा था।
उनका तर्क: compassion (दया) से जानवरों के साथ व्यवहार होना चाहिए, जबरदस्ती हटाना संभव नहीं।
20 जनवरी 2026 की सुनवाई में फटकार:
बेंच ने मेनका गांधी के वकील राजू रामचंद्रन से कहा: “आप कह रहे थे कोर्ट circumspect रहे, लेकिन आपकी क्लाइंट किसी पर भी कमेंट करती रहती हैं।”
“हमने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी… क्या आपने देखी?”
“उन्होंने contempt of court किया है… लेकिन हमारी magnanimity से कार्रवाई नहीं कर रहे।”
जस्टिस मेहता ने पूछा: “मेनका गांधी ने मंत्री रहते stray dogs समस्या के लिए कितना बजट अलॉट करवाया?”
कोर्ट ने कहा कि कुत्ते प्रेमी पक्ष की तरफ से पैशनेट तर्क दिए जाते हैं, लेकिन आम इंसानों (पीड़ितों) का पक्ष कोई नहीं रखता।
आगे क्या?
सुनवाई 28 जनवरी 2026 को जारी रहेगी।
कोर्ट ने स्टेरिलाइजेशन (ABC rules) लागू न होने पर भी नाराजगी जताई – Prashant Bhushan ने कहा कि स्टेरिलाइजेशन से आक्रामकता कम होती है, लेकिन ज्यादातर शहरों में प्रभावी नहीं।
यह मामला stray dogs vs human safety का बड़ा विवाद बन गया है – एक तरफ animal rights, दूसरी तरफ dog bites से मौतें (खासकर बच्चे/बुजुर्ग)।
मेनका गांधी की NGO People for Animals और अन्य animal activists इस मुद्दे पर सक्रिय हैं, लेकिन कोर्ट का रुख सख्त है। क्या होगा अंतिम फैसला? 28 जनवरी को और अपडेट्स आएंगे।
