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​सावधान: भारत पर मंडराया ‘अल नीनो’ का साया, 45 डिग्री के टॉर्चर के बीच सूखे का अलर्ट

​सावधान: भारत पर मंडराया ‘अल नीनो’ का साया, 45 डिग्री के टॉर्चर के बीच सूखे का अलर्ट

देश के कई हिस्सों में अप्रैल के महीने में ही सूरज की तपिश ने रिकॉर्ड तोड़ना शुरू कर दिया है। दिल्ली समेत उत्तर भारत में पारा 45 डिग्री के पार जा चुका है, लेकिन असली डराने वाली खबर आसमान से नहीं, बल्कि समुद्र की लहरों से आ रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में ‘अल नीनो’ की वापसी हो सकती है, जिससे मॉनसून कमजोर पड़ेगा और देश को भीषण सूखे का सामना करना पड़ सकता है।

​मई से जुलाई के बीच सक्रिय होगा ‘अल नीनो’

​विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, मई 2026 से प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियां फिर से मजबूत होने की संभावना है।

​तापमान में उछाल: मई-जून-जुलाई के दौरान वैश्विक तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने वाला है।

​प्रभावित क्षेत्र: इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और अमेरिका पर भी गहरा पड़ेगा।

​भारतीय खेती और मॉनसून पर ‘खतरे की घंटी’

​भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की खेती काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर है। IMD के अनुसार:

​कम बारिश का अनुमान: इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य से 8% कम बारिश होने के आसार हैं।

​सूखे की स्थिति: देश के कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

​ला नीना की उम्मीद: राहत की एकमात्र उम्मीद यह है कि जून से अगस्त के बीच ‘ला नीना’ सक्रिय हो सकता है (60-70% संभावना), जो अल नीनो के असर को कुछ कम कर सकता है।

क्या है अल नीनो (El Nino)? यह एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के पानी को गर्म कर देती है। जब यह सक्रिय होता है, तो हवाओं का रुख बदल जाता है, जिससे भारत जैसे देशों में बारिश कम होती है और गर्मी बढ़ जाती है। यह आमतौर पर 9 से 12 महीने तक प्रभावी रहता है।

​पिछली बार का सबक: जब आसमान से बरसी थी ‘आग’ साल 2023 में भी अल नीनो ने भारी तबाही मचाई थी:

​अगस्त का सूखा: पिछला अगस्त 123 वर्षों में सबसे सूखा रहा।

​महंगाई की मार: कम बारिश की वजह से धान और चीनी (गन्ना) की पैदावार घटी, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए।

​निर्यात पर रोक: सरकार को चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था ताकि देश में सप्लाई बनी रहे।

​प्रशासन की तैयारी भीषण लू को देखते हुए कई राज्यों में स्कूलों की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं और कहीं स्कूल की टाइमिंग बदल दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस साल मॉनसून ने दगा दिया, तो न केवल पीने के पानी की किल्लत होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ सकता है।

 

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