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ईरान विरोध प्रदर्शन: 3 दिन में सरेंडर करो, मिला ये अल्टीमेटम! पुलिस चीफ का बड़ा ऐलान, ‘धोखा खाए युवाओं’ को राहत का वादा

ईरान विरोध प्रदर्शन: 3 दिन में सरेंडर करो, मिला ये अल्टीमेटम! पुलिस चीफ का बड़ा ऐलान, ‘धोखा खाए युवाओं’ को राहत का वादा

तेहरान: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों (2025-2026 Iranian protests) के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान के राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को स्टेट टीवी पर एक अल्टीमेटम जारी किया – प्रदर्शन में शामिल हुए युवाओं को 3 दिन (72 घंटे) के अंदर सरेंडर करना होगा, वरना पूरी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

क्या कहा पुलिस चीफ ने?

रादान ने कहा: “जो युवा ‘धोखे’ में आकर दंगों (riots) में शामिल हुए, वे दुश्मन के सैनिक नहीं, बल्कि ‘धोखा खाए लोग’ हैं। अगर वे 3 दिन के अंदर सरेंडर कर देते हैं, तो इस्लामिक रिपब्लिक उन्हें काफी राहत (leniency) देगी।”

उन्होंने जोर दिया कि लीडर और हिंसक तत्वों के साथ सख्ती बरती जाएगी, लेकिन ‘धोखे में आए’ युवाओं को कम सजा मिलेगी।

यह अल्टीमेटम 19 जनवरी को जारी हुआ, यानी डेडलाइन 22 जनवरी 2026 तक है।

प्रदर्शनों का बैकग्राउंड:

प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए, शुरुआत आर्थिक संकट (महंगाई, बेरोजगारी) से हुई, लेकिन जल्द ही यह सरकार-विरोधी आंदोलन में बदल गया – सबसे बड़ा चैलेंज 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद।

अधिकारियों ने इसे “दंगे” और “विदेशी साजिश” (अमेरिका-इजराइल) बताया।

इंटरनेट ब्लैकआउट 8 जनवरी से जारी (अब 11-12वां दिन), जिससे जानकारी बाहर आना मुश्किल।

मौतों का आंकड़ा: ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स के अनुसार 4,000+ मौतें (ज्यादातर प्रदर्शनकारी), हजारों गिरफ्तारियां। सरकारी आंकड़े कम बताते हैं।

8-9 जनवरी सबसे खूनी रातें – लाइव फायरिंग, टॉक्सिक गैस, अस्पतालों में भी हमले की रिपोर्ट्स।

सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई ने “हजारों मौतें” मानीं, लेकिन विदेशी साजिश का आरोप लगाया।

सरकार की स्ट्रैटेजी:

अल्टीमेटम के साथ ही न्याय मंत्रालय ने ‘ईश्वर के खिलाफ अपराध’ के लिए मौत की सजा की चेतावनी दी।

इंटरनेट ब्लैकआउट जारी, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में इसे जल्द हटाने की बात।

प्रदर्शन अब काफी हद तक दब चुके हैं, लेकिन सख्ती जारी – एक्जीक्यूशन बढ़े, इंटिमिडेशन की रणनीति।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

UN और ह्यूमन राइट्स ग्रुप्स ने ईरान पर मौत की सजा और क्रैकडाउन की निंदा की।

अमेरिका-इजराइल पर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन कोई सैन्य हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं।

प्रदर्शनकारियों ने अल्टीमेटम को “धमकी” बताया, कई ने सरेंडर करने से इनकार किया।

यह अल्टीमेटम ईरान में सत्ता के खिलाफ सबसे बड़े आंदोलन को दबाने की कोशिश का हिस्सा है। 3 दिन के बाद क्या होगा – राहत या और सख्ती? स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। ईरान में इंटरनेट बंद होने से ग्राउंड रिपोर्ट्स सीमित हैं, लेकिन दुनिया नजर रखे हुए है।

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