महाराष्ट्र BJP में हलचल: देवेंद्र फडणवीस के करीबी विधायक संदीप जोशी ने अचानक राजनीति से संन्यास की घोषणा, पत्र में दलबदल और कुर्सी की स्पर्धा पर साधा निशाना
महाराष्ट्र BJP में हलचल: देवेंद्र फडणवीस के करीबी विधायक संदीप जोशी ने अचानक राजनीति से संन्यास की घोषणा, पत्र में दलबदल और कुर्सी की स्पर्धा पर साधा निशाना
मुंबई/नागपुर: महाराष्ट्र भाजपा में पुराने और नए चेहरों के बीच चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लंबे समय तक नागपुर कार्यालय सचिव रहे और उनके बेहद करीबी माने जाने वाले विधायक व पूर्व महापौर संदीप जोशी ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को अचानक सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर पार्टी में भूचाल मचा दिया।
संदीप जोशी का पत्र – मुख्य बातें: जोशी ने अपने लेटरहेड पर दो पन्नों का पत्र जारी किया, जिसका शीर्षक था “अब मुझे रुकना है”। प्रमुख अंश:
“मेरे लिए राजनीति हमेशा समाज सेवा का माध्यम रही है, लेकिन आज की राजनीति में पद और प्रतिष्ठा की दौड़, दलबदल, अवसरवादिता और कुर्सी की स्पर्धा मुझे स्वीकार नहीं।”
“सीमित सीटें और बढ़ती अपेक्षाएं निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए असहज माहौल बना रही हैं।”
“मैं दोबारा विधान परिषद की सदस्यता नहीं मांगूंगा। यदि पार्टी मुझे पेशकश भी करे, तो मैं मना कर दूंगा।”
“अब मुझे ही रुक जाना चाहिए, ताकि नए और योग्य कार्यकर्ताओं को अवसर मिल सके।”
जोशी वर्तमान में विधान परिषद सदस्य हैं और उनकी सदस्यता 13 मई 2026 को समाप्त हो रही है। वे 55 वर्षीय हैं और 2017-2022 तक नागपुर के महापौर रह चुके हैं।
क्यों लिया फैसला? – इशारा किस ओर?
पत्र में स्पष्ट रूप से दलबदल और बाहरी नेताओं की एंट्री पर कटाक्ष।
नागपुर महानगरपालिका चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और अन्य दलों के कई नेताओं को BJP में शामिल किया गया।
कांग्रेस के पूर्व नगरसेवक मनोज साबले को सीधे टिकट मिला।
इससे नाराज BJP पदाधिकारी विनायक डेहनकर ने बगावत कर पर्चा भरा।
तनाव इतना बढ़ा कि उनकी पत्नी (पूर्व मेयर) अर्चना डेहनकर चुनाव तक मायके चली गईं।
बाद में BJP ने नागपुर में 32 बागियों को 6 साल के लिए निलंबित किया।
राज्यभर में पिछले महीनों में 100+ नेताओं को पार्टी से बाहर किया गया, क्योंकि वे नए शामिल हुए नेताओं को टिकट मिलने से नाराज थे।
BJP नेतृत्व इस रणनीति को चुनावी विस्तार के लिए जरूरी बताता है। आंकड़े: 29 महानगरपालिकाओं में से BJP 25 में सत्ता बनाने की स्थिति में है।
कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया:
घोषणा होते ही कई कार्यकर्ता रो पड़े, नारे लगाए और जोशी से फैसला वापस लेने की गुहार लगाई।
उनके करीबी मानते हैं कि संवेदनशील स्वभाव के जोशी ने यह फैसला भावनाओं में लिया हो सकता है।
कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस (जो वर्तमान में दावोस में WEF में हैं) की वापसी पर बातचीत की मांग की।
जोशी ने मिलने पर सहमति जताई, लेकिन संन्यास के फैसले पर अडिग बताए जा रहे हैं।
मायने क्या हैं?
यह घटना महाराष्ट्र BJP में पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं vs नए शामिल चेहरों की खींचतान को उजागर करती है।
फडणवीस गुट में एक वफादार चेहरे का संन्यास पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े करता है।
2029 लोकसभा और 2024-2029 विधानसभा के बीच यह संकेत है कि टिकट वितरण और बाहरी एंट्री पर असंतोष बढ़ रहा है।
अगर फडणवीस वापस आकर मनाने में सफल नहीं हुए, तो नागपुर जैसे मजबूत गढ़ में असंतोष फैल सकता है।
यह फैसला महाराष्ट्र BJP के लिए बड़ा झटका है – क्या फडणवीस इसे टाल पाएंगे या यह असंतोष की नई लहर बनेगा? अगले कुछ दिनों में साफ होगा।
