राजनीति

एकनाथ शिंदे गुट का BMC मेयर और स्थायी समिति पर दबाव: बीजेपी नेताओं में भड़की नाराजगी: सूत्र

मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में महायुति (BJP-शिवसेना शिंदे गुट) की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सत्ता बंटवारे पर विवाद तेज हो गया है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने महापौर (Mayor) और स्थायी समिति (Standing Committee) अध्यक्ष पद पर मजबूत दावा ठोका है, जिससे बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी फैल गई है। सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट का यह दबाव गठबंधन के भीतर तनाव पैदा कर रहा है, क्योंकि बीजेपी मुंबई में अपना मेयर बनाने का लंबे समय से सपना देख रही है।

विवाद की वजह क्या है?

BMC चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी (89 सीटें), जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं। बहुमत (114 सीटें) के लिए शिंदे गुट का समर्थन जरूरी है।

शिंदे गुट का तर्क: BMC लंबे समय से शिवसेना की विरासत रही है (बालासाहेब ठाकरे से जुड़ा), और यह बालासाहेब का जन्मशताब्दी वर्ष है। इसलिए वे मेयर पद के लिए ढाई साल (2.5 वर्ष) का दावा कर रहे हैं या कम से कम स्थायी समिति अध्यक्ष पद पर पूरा नियंत्रण चाहते हैं। स्थायी समिति BMC के ₹75,000 करोड़ के खजाने को नियंत्रित करती है और सबसे ताकतवर मानी जाती है।

शिंदे ने अपने 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में शिफ्ट कर दिया है, जिसे ‘होटल पॉलिटिक्स’ या ‘रिजॉर्ट वार’ कहा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यह तीन दिवसीय वर्कशॉप और ओरिएंटेशन के लिए है, लेकिन विपक्ष इसे ‘बंधक’ बनाने का आरोप लगा रहा है।

बीजेपी का पक्ष: कई नेता कह रहे हैं कि वे मेयर पद पर कोई समझौता नहीं करेंगे। स्थायी समिति और इम्प्रूवमेंट कमिटी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बीजेपी का दावा अटल है। CM देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि फैसला शिंदे के साथ चर्चा से होगा, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही पर कोई समझौता नहीं।

बीजेपी में नाराजगी के सुर

सूत्रों ने NDTV और अन्य मीडिया को बताया कि शिंदे गुट द्वारा महापौर और स्थायी समिति अध्यक्ष पद पर दबाव बनाने से बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में भारी असंतोष है। कुछ का कहना है कि शिंदे गुट अपनी कम सीटों (29) के बावजूद ज्यादा पद मांगकर गठबंधन की मजबूरी का फायदा उठा रहा है। बीजेपी ने कभी मुंबई में मेयर नहीं बनाया, इसलिए इस बार वे पूरा कार्यकाल चाहते हैं।

विपक्ष का तंज

शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने कहा कि “कोई नहीं चाहता कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने, खुद एकनाथ शिंदे भी नहीं।” उन्होंने दावा किया कि कई शिंदे गुट के पार्षद उनके संपर्क में हैं और ताज होटल को ‘जेल’ बना दिया गया है। उद्धव ठाकरे ने भी शिंदे पर ‘बीजेपी से डरने’ का आरोप लगाया।

आगे क्या?

पर्दे के पीछे बातचीत जारी है। संभावना है कि मेयर पद बांटा जाए (ढाई-ढाई साल) या शिंदे गुट को स्थायी समिति अध्यक्ष और डिप्टी मेयर जैसे पद मिलें। लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो गठबंधन में दरार आ सकती है। महायुति ने BMC सहित 25 निकायों में जीत दर्ज की है, लेकिन मुंबई का मेयर कौन बनेगा – यह सवाल अब गर्म है।

क्या शिंदे गुट अपना दावा छोड़ेगा या बीजेपी झुकेगी? कमेंट में बताएं!

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